अपने इस दोस्त को भूलना किसानों को पड़ रहा है भारी

Bee Help Increasing Crop Productivity

Bee Help Increasing Crop Productivity : प्राचीन काल से फसल उत्पादन को बढ़ाने में मधुमक्खियों का अहम योगदान रहा है 

Bee Help Increasing Crop Productivity : आज के समय में जब देश के हर कोने से किसानों की आत्महत्या की खबरें आ रही हैं तो सरकार से लेकर आम आदमी तक उन पर पड़ने वाले दबावों को लेकर बात कर रहा है.

लेकिन अब भी शायद हम में से कोई उनकी तकलीफ का वास्तविक अंदाजा नहीं लगा पा रहा है कि वो किन हालातों से गुजर रहे हैं.
हाल के सालों में किसानों ने अपने फसल उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई तरीके अपनाए उनमे सबसे ज्यादा रसायनिक पदार्थों का इस्तेमाल शामिल है.
लेकिन दुख की बात यह है कि इस जिद में किसान भाईयों ने अपने सबसे प्यारे साथी मधुमक्खियों को भूला दिया है.
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जी हां शायद आपको पता नही होगा लेकिन किसान की सबसे अच्छी दोस्त अगर कोई है तो वो है मधुमक्खियां.
आपको जानकार यह हैरानी होगी कि धरती पर मौजूद 90% खाद्य वस्तुओं का उत्पादन करने में मधुमक्खियों का बहुत बड़ा हाथ होता है.
बादाम, काजू, संतरा, पपीता, कपास, सेब, कॉफी, खीरे, बैंगन, अंगूर, कीवी, आम, भिंडी, आड़ू, नाशपाती, मिर्च, स्ट्राबेरी, किन्नू, अखरोट, तरबूज आदि के फलों के उत्पादन में मधुमक्खियों के परागन का बड़ा असर पड़ता है.

उत्पादन में कैसे करती हैं मदद
गौरतलब है कि पूरे विश्व में मधुमक्खियों की 20,000 से ज्यादा प्रजातियाँ है लेकिन इनमें से सिर्फ 4 ही शहद बना सकती है.
बता दें कि एक छत्ते में 20 से 60 हजार मादा मधुमक्खी रहती है जो ग्रुप में फूलों के रस की तलाश में छत्ते से 10 किलोमीटर दूर तक चली जाती हैं.
वहीं एक बार में यह मधुमक्खियां 50 से 100 फूलों का रस अपने अंदर इकट्ठा कर सकती हैं, इसी तरह फूल,सब्जियों और बीजों पर जाकर यह परागण करती है जो कि किसी भी फसल के लिए बड़ा लाभदायक होता है.
कृषि क्षेत्र में किए गए एक शोध के मुताबिक मधुमक्खि और अन्य कीटों की परागण की उचित व्यवस्था से फसल की पैदावार में करीब 24 प्रतिशत की बढ़त पाई गई है.
वहीं अगर किसी पौधे पर अच्छी तरह से यानी बड़ी संख्या में परागण किया गया है तो वह फलों और सब्जियों को और भी रसभरा बना देता है.
लगातार कम होती मधुक्खियों की संख्या बड़ी चिंता
एक रिपोर्ट में ऐसा माना गया है कि मधुमक्खियों के पूरी तरह धरती से खत्म होने के बाद 100 में 70 फसल तो सीधे तौर पर नष्ट हो जाएगी, यहाँ तक कि घास भी नही उगेगी.
शायद वो दिन दूर नहीं कि दुनिया के कई देशों में यह एक बड़ी समस्या का रूप लेने वाली है और इसकी वजह किसानों द्वारा अधिक मात्रा में रसायन पदार्थों का इस्तेमाल है.
जैसे ही कोई भी कीट अपने परागण के लिए फूलों पर जाकर बैठता है वो सीधा रसायनिक उत्पादों के कॉन्टेक्ट में आ जाता है जिससे उसकी मौत की संभावना बढ़ जाती है.
यही वजह है कि खेती, फलों व सब्जियों की उत्पादकता के साथ उनकी पोषकता और गुणवत्ता पर हाल में काफी गिरावट आई है.
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क्या करना चाहिए
सबसे पहले किसानों को मधुमक्खियों और अन्य कीटों के बेहतर परागण के लिए अच्छे वातावरण की व्यवस्था करनी चाहिए. इसके लिए चाहिए कि वो कीटनाशकों का प्रयोग बंद कर दें या उसे बहुत कम कर दें.
इससे किसानों को उनकी फसलों में अच्छा पैदावार के साथ गुणवत्ता मिलेगी तो दूसरी तरफ सरकार को कीटनाशक दवाओं और जहरीले कैमिकल की निर्भरता को खेती से दूर करने में काफी मदद मिलेगी.
सबसे महत्वपूर्ण इससे देश के हर वर्ग के लोगों तक बेहतर और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ मिल सकेगें.