भिलाई स्टील प्लांट ब्लास्ट का गुनहगार कौन, कब मिलेगी कर्मचारियों को पूरी सुरक्षा ?

Bhilai Steel Plant Blast

Bhilai Steel Plant Blast : 11 लोगों की हो चुकी है मौत और 14 अब भी अस्पताल में भर्ती

Bhilai Steel Plant Blast : रोज़ की तरह छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में लोग हाथ में खाने का डब्बा लिए भिलाई स्टील प्लांट पहुंचे थे.

घर से निकलते वक्त कोई सोचकर आया था कि शाम को जाकर बच्चों को घूमने ले जाऊँगा तो कोई सोच रहा होगा कि नवरात्र आने  को हैं तयारी करनी हैं…लेकिन इसी बीच भगवान को शायद कुछ और ही मंजूर था.
11 बजे हुआ जोरदार धमाका
सुबह के करीब 11 बजे थे और सभी कर्मचारी अपने-अपने काम में लगे थे कि अचानक एक ज़ोर की आवाज़ हुई और लोगों की आँखों के आगे अँधेरा छा गया.
इससे पहले कोई कुछ समझ पाता वहां अफरा-तफरी मच गयी और इस बीच 11 मजदूरों ने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया.
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तो ये था विस्फोट का कारण 
पुलिस सूत्रों के अनुसार भिलाई स्टील प्लांट में बने कोक ओवन  में 1800 एमएम की गैस की पाइपलाइन में सुधार का काम चल रहा था  जिसमें करीब 25 कर्मचारी काम करने में लगे हुए थे, तभी अचानक एक पाइप लाइन में ब्लास्ट हो गया जिसकी वजह से कई कर्मचारी झुलस गए.
बता दें  घटना के बाद मौके पर पुलिस और दमकल की गाड़ी पहुंची थी, घायल कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जिसमें कईयों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है. 
मुख्यमंत्री ने जताया शोक 
इस हादसे के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने ट्वीट किया कि, “भिलाई इस्पात संयंत्र में हुई गैस पाईपलाइन दुर्घटना से मुझे बहुत दुख पहुंचा है, इस हादसे में प्राण गंवाने वाले भाई-बंधुओं को भावभीनी श्रद्घांजलि, मैं ईश्वर से उनके परिवार को धैर्य प्रदान करने एवं घायलों के शीघ्र स्वास्थ लाभ की कामना करता हूं”
 पहले भी हो चुका है प्लांट में ब्लास्ट 
ज्ञात हो भिलाई स्टील प्लांट में साल 2014 की जून में भी एक ऐसा ही हादसा हुआ था जिसमें 5 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे. उसके बाद यह दूसरी बार है जब इस प्लांट में ऐसा हादसा हुआ है.
सरकार को जल्द से जल्द इस प्लांट की सुरक्षा में कदम उठाने चाहिए नहीं तो आने वाले समय में कोई और बड़ा हादसा भी हो सकता है.
कब मिलगी कर्मचारियों को सुरक्षा
सरकार के अंतगर्त आने वाली देश की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी में अगर इतनी बड़ा हादसा होता है तो इसपर सरकार से सवाल पूछना लाजमी है.
पहला सवाल आखिर इतनी बड़ी चूक हो कैसे गई? दरअसल इस स्टील प्लांट में जो इंजीनियर काम करते हैं उनकी सैलरी लाखों में होती है और उनका काम रहता है कि वो कंपनी की मशीनों को संचालन और उनके रखरखाव पर नजर बनाए रखें.
मगर यहां कहने में बिल्कुल भी हिचक नहीं होनी चाहिए कि इस ब्लास्ट में अधिकारियों का लापरवाही साफ तौर पर सामने आई है.
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बता दें कि इस इकाई में पिछले 60 सालों में कई हादसे हुए हैं और इन हादसों को लेकर प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं. लेकिन फिर भी किसी सरकार की तरफ से कभी भी गंभीरता नहीं जताई गई है.
मीडिया से बातचीत में कुछ लोगों ने दबे जुबान से कहा कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की तीन इकाइयों की तरह भिलाई इस्पात संयंत्र के भी निजीकरण की योजना धीरे धीरे बनती जा ही रही.
यही कारण है कि इसके रखरखाव में लगातार इंजीनियरों से लेकर बड़े आधिकारियों तक इसकी उपेक्षा कर रहे हैं.
खैर हम अपनी ओर से इस हादसे में प्राण गवाने वाले सभी कर्मचारियों को भावनात्मक श्रद्धंजलि अर्पित करते हैं और उम्मीद करते हैं जल्द उनके परिवार में सभी कुछ सामन्य होगा.