कौन हैं CJI रंजन गोगोई ? कामकाज के पहले ही दिन भाजपा नेता की खारिज करी याचिका

Common Man Also Visit Supreme Court
साभार - सोशल

CJI Ranjan Gogoi First Day Decision : चीफ जस्टिस बनते ही पहले दिन किया रोस्टर चेंज

CJI Ranjan Gogoi First Day Decision : 18 नवंबर, 1954 को जन्मे जस्टिस रंजन गोगोई ने कल यानि की 3 अक्टूबर 2018 को भारत के 46वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के रूप में शपथ ले ली है. उनको यह शपथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिलाई है.

चीफ जस्टिस के एजुकेशन की बात करे तों तो उन्होंने असम के डिब्रूगढ़ के डॉन बोस्को स्कूल से अपनी इंटर तक की पढ़ाई पूरी करी है. इसके बाद रंजन गोगोई ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास विषय से ग्रेजुएशन किया.
असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के पुत्र रंजन गोगोई ने 1978 में बतौर वकील अपना रजिस्ट्रेशन कराया और गुवाहटी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी. खास बात यह रही कि गोगोई को इसी कोर्ट में साल 2001 में जज भी बनाया गया था.
इसके बाद साल 2011 में उन्हें पंजाब व हरयाणा का मुख्य न्यायधीश बनाया गया और अगले ही साल यानि की 2012 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज जगह मिल गयी.
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बतौर सुप्रीम कोर्ट जज लिए गए कुछ अहम फैसले
1. असम में लगातार हो रही घुसपैठ को देखते हुए NRC लाने का फैसला जस्टिस गोगोई ने ही दिया था.
2. जेनयू में कन्हैया कुमार के खिलाफ एसआईटी का गठन रोकने वाले रंजन गोगोई ही थे.
3. जाटों को OBC से अलग करने का फैसला देने वाली बेंच में गोगोई शामिल थे.
4. पूर्व न्यायधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रदर्शन में भी गोगोई की मौजूदगी थी

CJI Ranjan Gogoi First Day Decision

चीफ जस्टिस बनते ही पहले दिन लिया ये फैसला 
जस्टिस रंजन गोगोई ने CJI का पद संभालते ही सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट का रोस्टर चेंज किया, बता दें कि यह वही रोस्टर है जिसके खिलाग गोगोई समेत 4 जज ने इस साल की शरुआत में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी.
रोस्टर में बदलाव करते हुए गोगोई ने फैसला लिया है कि अब जनहित से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई वो खुद ही करेंगे.
साथ ही चुनाव संबंधी याचिका, कोर्ट की अवमानना से जुड़ी याचिका, सामाजिक न्याय, आपराधिक मामले और संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की याचिकाओं जैसे मामलों को किस बेंच के पास भेजा जाना है यह भी खुद रंजन गोगई ही तय करेंगे.
जब शपथ लेने के बाद गोगोई ने छूए “इनके” पैर 
शपथ लेने के बाद जब सभी लोग रंजन गोगोई को अभिनन्दन दे रहे थे, तब गोगोई ने एक महिला के चरणस्पर्श करते हुए आशीर्वाद लिया था,  यह महिला कोई  और नहीं बल्कि उनकी माँ थीं.
गौरतलब है कि पूर्वोत्तर से आने वाले लोगों में रंजन गोगई पहले चीफ जस्टिस हैं.
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पहले ही दिन भाजपा नेता की याचिका करी खारिज
चीफ जस्टिस के सख्त तेवर का उदाहरण देखने को मिलना शुरू हो गया है.अपमे कामकाज के पहले ही दिन उन्होंने बीजेपी नेता अश्वनी उपाध्याय की चुनाव सुधार को लेकर दाखिल कि गई जनहित याचिका को खारिज कर दिया है.
दरअसल बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्यय ने अपनी याचिका में कहा था कि केंद्र सरकार को चुनावी याचिकाओं के जल्द निपटारे, हाईकोर्ट में ऐसे मामलों की सुनवाई छह महीने या साल में पूरी करने के लिए अतिरिक्त जजों की नियुक्ति के निर्देश दिए जाएं.