पीएम साहब गंगा के लिए लड़ने वाले जीडी अग्रवाल तो मर गए अब उनकी मांगो का क्या ?

GD Agrawal Ganga Conservation Demand

GD Agrawal Ganga Conservation Demand : गंगा को साफ और अविरल बनाने के लिए प्रोफेसर अग्रवाल को देनी पड़ी कुर्बानी

GD Agrawal Ganga Conservation Demand : पिछले 112 दिनों से अनशन पर बैठे जीडी अग्रवाल उर्फ़ स्वामी ज्ञान स्वरुप आनंद का 11 अक्टूबर को 86 साल की उम्र में  निधन हो चुका है.

लेकिन उनकी मौत के बाद ये सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या सरकार आगे भी मां गंगा को लेकर उनकी मांगों को पूरा करने की कोशिश करेगी.

बता दें जीडी अग्रवाल पिछले 112 दिन से गंगा में फ़ैल रहे प्रदूषण के खिलाफ अनशन पर बैठे थे, 10 अक्टूबर के बाद से तो उन्होंने जल का भी पूरी तरह त्याग कर दिया था.
जिसके बाद उनकी हालत और खराब हो गई इसे देखते हुए उन्हें AIMS श्रषिकेश में भर्ती कराया गया जहां आखिरकार उन्होंने तोड़ दिया.
डॉक्टरों की रिपोर्ट में उनकी मौत का कारण कार्डिक अरेस्ट बताया जा रहा है.
मगर सच पूछिए तो ये एक कार्डिएक अटैक से होने वाली मौत नहीं बल्कि मडर्र है जिसे सरकार,सिस्टम, प्रशासन और कही ना कहीं हम सब ने मिलकर करी है.
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कौन थे जीडी अग्रवाल ? 
जीडी अग्रवाल IIT – KANPUR के प्रोफेसर थे जो बाद में गंगा की सफाई को लेकर आंदोलन में जुट गए.
जीडी अग्रवाल का जन्म यूपी  के मुजफ्फनगर जिले में हुआ था और उन्होंने रूड़की यूनिवर्सिटी से इन्वारमेंटल जीनिरिंग की पढ़ाई की थी.
प्रोफेसर अग्रवाल एक दम साधारण गांधीवादी जिंदगी जीते थे, छोटे से झोंपड़े में रहते थे जहां साफ़ सफाई से लेकर अपने लिए खाना बनाने तक सब काम वो खुद ही किया करते थे.

GD Agrawal Ganga Conservation Demand

पीएम मोदी को लिख चुके थे तीन पत्र 
अब जब जीडी अग्रवाल नहीं रहे हैं तो पीएम मोदी ने ट्वीट करके शोक तो जता दिया है लेकिन उनके जीते जी पीएम साहब ने उनके द्वारा लिखे गए तीन में से किसी भी एक पत्र का जवाब तक नहीं दिया था.
डॉ अग्रवाल ने पहला पत्र अनशन से पहले 13 जून को फिर दूसरे अनशन की शुरूआत वाले दिन यानी की 22 जून और आखिरी में तीसरा पत्र मृत्यु से पूर्व 05 अक्तूबर को मोदी लिखा था.
अपने आखिरी पत्र में जीडी अग्रवाल ने रखी चार मांगे
जीडी अग्रवाल ने पीएम मोदी के सामने अपने आखिरी पत्र में 4 मांग रखते हुए कहा था कि अगर ये नहीं मानी गयीं तो वो आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे और ठीक वैसा ही हुआ.
पहली मांग : गंगा महासभा द्वारा तैयार प्रारूप पर संसद में विधेयक लाकर कानून बनाने की मांग 
दूसरी मांग : अलकनंदा, धौलीगंगा, नंदाकिनी, पिंडर और मंदाकिनी नदियों पर बन रही जलविद्युत परियोजनाओं को अविलंब बंद करने का आदेश देने को कहा 
तीसरी मांग : हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में पेड़ों की कटाई, खनन और चमड़ा उद्योग-बूचड़खानों को बंद कराने की बात कही  
चौथी मांग : जीडी. अग्रवाल ने जून 2019 तक गंगा भक्‍त परिषद का गठन करने की मांग की
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उमा भारती ने की थी जीडी अग्रवाल से मुलाकात 
बता दें उमा भारती जीडी अग्रवाल से मिलने गयी थीं और उसके बाद उन्होंने उनकी बात नितिन गडकरी से भी कराई  थी लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला था.
या यूं, कहें कि जीडी अग्रवाल को उनका दिया गया सुझाव समझ नहीं आया था और बात वहीं खत्म हो गई.

GD Agrawal Ganga Conservation Demand

हर दिन घुट रहा गंगा का दम
गंगा में प्रदुषण का आलम क्या है ये सभी को पता है,ऐसे में अगर किसी इंसान ने इसे खत्म करने की कोशिश करनी चाही तो उसे ही अपनी जान गंवानी पड़ गई.
वो भी उस सरकार में जो गंगा के नाम पर राजनीति करने में सबसे अव्वल नंबर है.
इन्हीं के बनाए गए गंगा मंत्रालय ने साल 2016 में खुद सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा दायर कर बताया था कि पहाड़ों पर गंगा और उसकी सहायक नदीयों पर बनने वाले बांधों से जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई नहीं की जा सकती है.
इस लिए तत्काल रूप से बांधों पर रोक लगाई जाए ताकि भविष्य में पर्यावरण के खतरे से बचाया जा सके, लेकिन शायद ही इसे गंभीरता से लिया गया हो.
आज की स्थ्ति पर नजर डाले तो गंगा, अल्कनंदा, भागीरथी और मंदाकनि नदी पर 70 से ज्यादा बांध बनाने की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें से 19 पूरी हो चुकी हैं.
रिपोर्ट की माने तो इस बांधों के बनने के बाद नदीं में जल का पर्याप्त प्रवाह ना होने का खामियाजा पर्यावरण और नदीयों के नीचले स्थानों पर दिखना शुरू हो गया है.
इसमें राहत की थोड़ी बात यह है कि गंगा पर प्रस्तावित 24 बांधों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल के लिए रोक लगा रखी है.
लेकिन जरा सोचिए इतनी बड़ी मात्रा में नदियों पर होने वाले हैवी कंस्ट्रकशन का दृश्या कितना भयानक सा दिखता होगा.
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जीडी अग्रवाल के मरने के बाद क्या
जीडी अग्रवाल की मौत हो चुकी है और इसमें कोई शक नहीं कि अब सरकार उनकी पार्थिव शरीर की तरह उनकी मांगो को भी दफना देने में कोई देरी नहीं करेगी.
उन्हें गंगा को प्रदुषण मुक्त और अविरल बनाने का ड्राफ्ट तैयार कर सरकारी कार्यालयों में भेजा था वो अगर बचा रहा तो धूल खाते हुए कुछ सालों मे मटमैला होकर धुंधला हो जाएगा नहीं तो समोसे की चटनी के काम तो आ ही जाएगा.
मगर हम अब भी भगवान से यही चाहेंगे कि काश हमारी ये बाते झूटी साबित हो जाएं.
हम अपनी ओर से जीडी अग्रवाल को भावनात्मक श्रद्धांजलि अर्पित  और उम्मीद करते हैं कि जल्द गंगा की सफाई होगी.