UNHRC में भारत की जीत का क्या है मतलब, कुछ फायदा होगा ?

India Wins UNHRC Election

India Wins UNHRC Election : 193 में से 188 वोटों के साथ भारत को मिली ये कामयाबी

India Wins UNHRC Election : यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (UNHRC) का चुनाव जीतकर भारत ने एक बार फिर अपनी ताकत दुनिया को दिखा दी है.

बांग्‍लादेश, बहरीन, फिलीपींस और फिजी के साथ इस चुनाव में खड़े भारत को सबसे ज़्यादा वोटों से जीत मिली है.
ख़ास बात यह है कि भारत ऐसे समय में ये चुनाव जीता है जब भारत की मौजूदा सरकार पर लगातार मानवाधिकारों के हनन का आरोप लग रहा है.
जानिए क्या काम करता है UNHRC 
यूएनएचआरसी की सबसे पहले स्थापना साल 1950 में हुई थी और तब इसका नाम UNHCR था, जिसका मतलब यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्‍नर फॉर रिफ्यूजी था.
इस संस्था को बनाने का मुख्य कारण यह था कि दुनियाभर में मानवाधिकारों को बढ़त मिले और इसकी रक्षा की जा सके.
15 मार्च 2006 को एक और प्रस्ताव पास हुआ जिसमें सबने मिलकर नए नाम के साथ UNHRC का गठन किया.
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India Wins UNHRC Election

भारत को इसमें शामिल होने से क्या फायदा होगा ? 
सबसे पहले तो आपको यह जानना ज़रूरी है कि भारत UNHRC में 2006 में ही सदस्य बन गया था लेकिन यह केवल एक साल के लिए था. फिर इसके बाद भी भारत 2007,2011 से 2014 और 2014 से 2017 तक तीन साल के लिए सदस्य बना था.
भारत को 193 में से 188 वोट मिले हैं जो ये दर्शाता है कि कैसे दुनिया का भरोसा भारत पर बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह हमारे लिए अच्छे चिन्ह साबित हो सकते हैं.
यूनाइटेड नेशंस (यूएन) में भारत के स्‍थायी राजदूत सैयद अकबरूद्दीन के अनुसार यह भारत की बड़ी जीत है और इससे भारत का कई अंतर्राष्ट्रीय मंच के लिए रास्ता साफ़ होगा.
तो इस तरह से काम करती है UNHRC 
दरअसल UNHRC, अपने 125 सदस्य देशों में मानवाधिकारों को लेकर जांच करती है, यह अभिव्यक्ति की आज़ादी से लेकर नस्लीय अपराधों तक सभी  मामलों में दखल देती है.
जैसे संघ और असेंबली की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी, विश्वास और धार्मिक आजादी, महिलाओं के अधिकार, एलजीबीटी समुदाए का हक.
और भी कई ऐसे मामले में जिसमें किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता या उसके चरित्र का हनन हो रहा है.
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जानिए UNHRC की कुछ ख़ास बातें 
1. इसका मुख्य हेडक्वाटर स्विज़ेरलैंड के जेनेवा में है.
2. इस साल जुलाई में UNHRC का 38वां सत्र हुआ है.
3. इसमें 47 सदस्य देश हैं,भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इन्हें 5 समूहों में बांटा गया है.
अफ्रीकन स्टेट्स में 13 सदस्य, एशिया-पसिफिक में 13 सदस्य, ईस्टर्न यूरोपियन स्टेट्स में 6 सदस्य, लैटिन अमेरिकन और कैरिबियन स्टेट्स में 8-8 सदस्य, जबकि वेस्टर्न यूरोपियन और अन्य स्टेट्स के लिए 7 सीटें निर्धारित हैं.
भारत की इस  जीत को मोदी सरकार की भी बड़ी जीत कहा जा रहा है क्योंकि इसमें पीएम मोदी की विदेश नीतियों का योगदान रहा है.