धरती पर मंडरा रहा है गर्म हवाओं का खतरा, जल्द दिख सकता है भयावह रुप

IPCC Global Warming Report

IPCC Global Warming Report : ग्लोबल वार्मिंग के कारण समय से पहले ही अधिक गर्म हो गयी है धरती 

IPCC Global Warming Report : संयुक्त राष्ट्र ने ग्लोबल वार्मिंग के चलते जलवायु परिवर्तन में तीव्रता से हो रहे खतरनाक बदलावों को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है.

इस रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक जलवायु अव्यवस्था से दुनिया के अस्तित्व पर सबसे बड़ा खतरा मंडराने के अनुमान लगाए गए हैं.
बता दें कि राष्ट्र संघ की इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि वैश्विक जलवायु अव्यवस्था से बचने के लिए दुनियाभर की अर्थव्यवस्था और समाज में बदलाव नहीं लाया गया तो हम सभी को गंभीर दुष्परिणाम झेलने पड़ेंगे.
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कैसे पड़ रहा है प्रभाव 
अंतर सरकारी पैनल (IPCC) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार साफ है धरती की सतह का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है जिसके कारण तूफान, बाढ़ और सूखे की स्थिति और गहराती जा रही है.
वहीं रिपोर्ट के अनुसार धरती के तापमान में लगातार बढ़ोतरी की दर तीन से चार डिग्री की ओर बढ़ रही है.
इन आंकड़ों से अनुमान लगाया गया है कि ग्रीन हाउस गैस का जो उत्सर्जन हो रहा है ऐसी स्थिति में न्यूनतम 2030 तक पृथ्वी का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है.
इस रिपोर्ट के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए IPCC के सह-अध्यक्ष और दक्षिण अफ्रीका के डरबन में इंवायरमेंट प्लानिंग एंड क्लाईमेट प्रोटेक्शन डिपार्टमेंट के प्रमुख डेबरा रॉब‌र्ट्स का कहना है कि आगे आने वाले कुछ साल मानव इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं.
कैसें करें बचाव
रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 सेल्सियस की लिमिट में रखने के लिए हर साल 2.4 ट्रिलियन डॉलर या वर्ल्ड जीडीपी का 2.5 फीसदी का निवेश वैश्विक उर्जा प्रणाली में  2016 से 2035 तक करना होगा.
इस निवेश के लिए जरूरी है कि दुनिया के सभी देशों को मिलकर इस स्थिति पर काबू करना होगा.

समस्या से निपटने के लिए बनाई सारांश रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र ने ग्लोबल वार्मिंग की भयावह स्थिति से निपटने के लिए सोसायटी और विश्व अर्थव्यवस्था के बड़े बदलाव लाने का सुझाव दिया है.
साथ ही पॉलिसीमेकर्स के लिए 400 पेज का सारांश भी बनाया है. इस रिपोर्ट में इस बात के आंकडें दर्शाते हैं कि किस तरह मानव ग्लोबल वार्मिग को रोकने में असफल है.
वहीं आइपीसीसी के ही एक सह-अध्यक्ष और इंपीरियल कॉलेज लंदन के सेंटर फॉर इंवायरमेंटल पॉलिसी में प्रोफेसर जिम स्किया ने कहा है कि रिपोर्ट और समस्या की गहराई का पता लगाकर हमने सर्तक रहने का संदेश दे दिया है, अब सरकारों को अपनी जिम्मेदारी निभानी है.
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रिपोर्ट में भारत की स्थिति
इस रिपोर्ट में भारत के कोलकाता शहर और पाकिस्तान के कराची शहर का भी जिक्र किया गया है, और विशेष चेतावनी देते हुए कहा है कि यहां गर्म हवाओं से सबसे अधिक विनाश देखने को मिल सकता है.
बता दें कि रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में कराची और कोलकाता को साल 2015 जैसे गर्म थपेड़ों का सामना करना पड़ सकता है.
रिपोर्ट में गर्म हवाओं के कारण होने वाली मृत्यु में भी इजाफा बताया गया है और साथ ही सूखा पड़ने से होने वाली गरीबी के बढ़ने के संकेत भी दिए हैं.