13 मासूम लोगों की हत्या करने वाली आदमखोर बाघिन की मौत पर इतना बवाल क्यों ?

Maharashtra Tigress Avni Killing Controversy
फोटो साभार - सोशल

Maharashtra Tigress Avni Killing Controversy : 02 नवंबर को एक अभियान चलाकर वन विभाग ने बाघिन को मार डाला

Maharashtra Tigress Avni Killing Controversy : कई दिनों से महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में मासूम लोगों की मौत का तांडव मचा चुकी आदमखोर बाघिन को मौत के घाट उतार दिया गया है.

वन अधिकारियों ने शनिवार को मीडिया को बताया की उन्होंने शुक्रवार रात यानि की 02 नवंबर को एक अभियान चलाकर अवनि नाम की बाघिन को मार डाला
बता दें कि इस खूंखार बाघिन ने करीब 2 साल में जिले के गांवों में लगभग 13 बेकसूर लोगों को अपना शिकार बनाकर उनकी जान ले ली थी.
इस बाघिन का स्थानिय लोगों के अंदर इस कदर खौफ था कि वो दिन में ही अपने-अपने काम से वापस लौट आते थे. इसके अलावा जहां जाते थे सूमह में ही जाते यहां तक की लोगों ने खुले में शौच भी जाना छोड़ दिया था.
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बाघिन को पकड़ने के लिए बिछाए गए कई जाल
बता दें कि बाघिन के शिकार के लिए वन विभाग ने जिले के संवेदनशील इलाकों में 100 से अधिक कैमरे लगाए थे. उसे आकर्षित करने के लिए पेड़ पर नकली घोड़े और बकरी बांधी गई थी और इसमें कैमरा छिपाया गया था ताकी उसकी अपडेट ली जा सके.
वहीं इसके अलावा पेड़ों पर वन्यकर्मियों की तैनाती की गई थी साथ ही पेट्रोलिंग गाड़ियो से नजर भी रखी जा रही थी.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वनाधिकारियों ने प्रशिक्षित श्वान दस्ते, ट्रैप कैमरे, ड्रोन, हैंग ग्लाइडर, विशेषज्ञ ट्रैकर्स, शार्प शूटरों और 200 लोगों को इस अभियान में शामिल किया था.
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कैसे हुआ शिकार
अधिकारियों ने बताया की उसे पकड़ने के लिए हमने दूसरी बाघिन के मूत्र और अमेरिकी इत्र का इलाके में छिड़काव किया था  जो काम आ गया.
इसे सूंघते हुए बाघिन वहीं आ पहुंची जिसे देखते हुए गांव वालों में तुरंत ही वन विभाग को सूचित किया. इसके बाद उनकी टीम की गाड़ी रालेगांव थाने की सीमा में पड़ने वाले बोराती जंगल में पहुंची जिसमें ट्रैंक्विलाइज़र गन और बंदूक़ पहले से मौजूद थी.
अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने बाघिन को जिंदा पकड़ने की कोशिश करी मगर घना जंगला और अंधेरा होने की वजह से वो ऐसा नहीं कर सके और अंतिम उपाए के तौर पर उसपर एक गोली दागी गई जिसके बाद वो वहीं गिर गई.
बता दें कि उन्हें गोली मारने वाले शार्पशूटर का नाम असगर अली था जो मशहूर शार्पशूटर शफत अली के बेटे हैं.
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अब शुरू हुआ विवाद
अवनि की मौत के बाद तमाल पर्यावरणविद और सामाजिक संघटनों ने कई सवाल खड़े कर दिए और इसे जानबूझकर की गई हत्या बता रहे हैं.
यहां तक की केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इसे आपराधिक घटना बताते हुए महाराष्ट्र सरकार की कड़ी निंदा करी है.

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उन्होंने अपने ट्वीटर पर लिखा की जिस तरह से अवनि को यवतमान में निर्दयता से मारा गया मैं उसे बहुत दुखी हूं. यह कुछ नहीं बल्कि सीधा सीधा एक आपराधिक मामला है. कई पक्षों के अनुरोध के बावजूद महाराष्ट्र के वन मंत्री (सुधीर) मुंगतिवार ने मारने का आदेश दिया.
बता दें कि इस बाघिन को माफी देने के लिए ऑनलाइन याचिकाओं की बाढ़ आ गई थी. वहीं हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सितंबर में कहा था कि अगर उसे पकड़ना मुमकिन नहीं हो रहा है तो आदमखोर बाघिन को गोली मारी जा सकती है.
लेकिन अब केंद्रीय मंत्री के तीखे तेवर को देखकर लगता है कि वो इस मामले को आगे बढ़ा सकती हैं.सिर्फ यही नहीं बल्कि कई लोगों ने बाघिन की मौत के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की कड़ी निंदा करी है.
कुछ लोगों ने शूटर असगर अली पर सवाल उठा दिए हैं की उन्होंने जानबूझकर बेहोश करनी वाली गन का इस्तेमाल नहीं किया.
हालांकी लोगों के विरोध के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी है.
लेकिन यहां सवाल यह है कि अगर किसी इंसान की हत्या करने के मामले में आरोपी को भारतीय कानून के तहत मौत की सजा सुनाई जा सकती थी तो फिर जानवर के लिए इस मामले में क्या सजा होनी चाहिए.
इसने तो लगभग 13 लोगों की नृशंस हतया करी थी, सोचियागा जरूर…..

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