असमानता दूर करने में भारत हो रहा असफल, नामीबिया से भी ले सकता है सीख

Oxfam Inequality Index Report 2018
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Oxfam Inequality Index Report 2018 : 157 देशों की सूची में 147वें स्थान पर है भारत

Oxfam Inequality Index Report 2018 : आज के समय में लोगों के बीच कई तरह के अंतर है, अमीरी-गरीबी,ऊंच नीच से लेकर भोजन-पानी तक हर जगह हम सब को एक दूसरे के बीच असमानता नजर आ जाएगी.

ऐसे में पूरी दुनिया के खुशहाल रहने के लिए जरूरी है कि इन असमानताओं को खत्म कर दिया जाए, और कई देश इसे लेकर तमाम तरह की कोशिशें भी कर रहे हैं.
अंतराष्ट्रीय संस्था ऑक्सफैम (Oxfam) ने देशों के असमानता इंडेक्स पर एक रिपोर्ट जारी कि है.
जिसमें यह बात सामने आई है कि अफ्रीकी देश नामीबिया और उरुग्वे ने बेहतर प्रयास करते हुए अपने टैक्शेशन और समाजिक खर्च में बदलाव लाकर देश के अंदर अमीरी गरीबी के अंतर को कम करने की उम्दा कोशिश कर रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक उनकी यह कोशिशें भारत और नाइजीरिया जैसे देशों से ज्यादा असरदार है जो ऐसा करने में नाकाम रहे हैं.
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कैसे तय होता है इंडेक्स
असमानता इंडेक्स का आधार साफ है इसमें देश के सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले 10 प्रतिशत लोगों की तुलना सबसे कम पैसा कमाने वाले 10 प्रतिशत लोगों के साथ किया जाता है.
इसी फर्क से अंदाजा लगाया जाता है कि देश की सरकारों के प्रयास कितने कारगर हैं.
डेनमार्क का स्थान पहला
ऑक्सफॉम की लिस्ट में डेनमार्क को सबसे ऊपर के स्थान पर रखा गया है. इसके बाद दूसरे नंबर पर जर्मनी तीसरे पर फिनलैंड चौथे पर ऑस्ट्रिया,  नॉर्वे पांचवें, बेल्जियम छठे, स्वीडन सातवें, फ्रांस आठवें, आइसलैंड नवें और लग्जमबर्ग दसवें स्थान पर हैं.
ऑक्सफैम के मूताबिक यूके स्लोवेनिया और ऑस्ट्रेलिया के बाद 14 वें स्थान पर क्रोएशिया है जो इटली जैसे बड़े देशों से भी ऊपर है.
वहीं यूके यानि कि ब्रिटेन की बात करें तो ये टैक्स प्रणाली के कारण 99 वें स्थान पर है. इसके पीछे उच्च वैट का संयोजन और 19% की कम कॉर्पोरेट दर कारण है.
नामीबिया ने दक्षिण अफ्रीका के 31 के मुकाबले 32 की रैंकिंग हासिल करने के बाद लगभग अपने सबसे समृद्ध पड़ोसी की बराबरी कर ली है.
ऑक्सफैम ने भारत के स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण खर्च के हिसाब से बहुत कम बताया है और इसे देश के लिए बुरा भी बताया है. साथ ही यह भी कहा कि देश को एक प्रगतिशील टैक्स प्रणाली की जरूरत है.
इस लिस्ट में नाइजीरिया 157 वें स्थान के साथ सबसे निचले स्थान पर है. इसका कारण राष्ट्र बाल मृत्यु दर से निपटने में असफलता को माना जा सकता है, वह अब भी 10 में से पांच बच्चे पांच साल के होने से पहले ही मर जाते हैं.
इसके अलावा वहां श्रम अधिकारों का उल्लंघन भी आम हैं और अमीर अक्सर टैक्स देने से बचते हैं.
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भारत का हाल हुरा
ऑक्सफैम की इस लिस्ट में भारत को नीचे से 11वां स्थान दिया गया है जो ये दर्शाता है कि अपने देश के अंदर अमानता को कम करने के मामले में हम अब भी किने पीछे हैं.
ऑक्सफैम ने भारत के स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण खर्च को बहुत कम बताया है जो कि इसके लिए काफी बुरा है.
बता दें कि सामाजिक संरक्षण पर खर्च के मामले में भारत 151वें, श्रम अधिकारों और मजदूरी के मामले में 141वें और कराधान नीतियों के मामले में 50वें स्थान पर है.
साथ ही यह भी भारत जैसे बड़े देश एक प्रगतिशील टैक्स प्रणाली की जरूरत है.
 गौरतलब है कि ऑक्सफॉम की इस लिस्ट में सामाजिक खर्च, कर और श्रम अधिकार संबंधी उनकी नीतियों के आधार पर रैंकिंग दी गई है.
हालांकि कई बड़े इकॉनिमिस्ट्स का कहना है कि यह इंडेक्स इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितने अमीर देश हो बल्कि इस पर निर्भर करता है कि आपकी कितनी कोशिशें की जा रही है गरीब और अमीर के बीच के अंतर को कम करने की.

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