गोबर से अब बन सकेगा कैरी बैग, सरकार के नए प्रयोग से मालामाल होंगे किसान

Paper Makes From Cowdung

Paper Makes From Cowdung :  गोबर से बने कागज गुणवत्ता में काफी बेहतर और किफायती भी हैं.

Paper Makes From Cowdung : हमारे देश के हिंदू समाज में गाय को बहुत पूजनीय माना जाता है, यही वजह है कि लोग उनके गोबर को भी काफी पवित्र मानते हैं.

गाय के गोबर का इतना महत्व है कि आपको हर गली और मंदिर में पंडित इसके तमाम फायदे बताते मिल जाएंगे,लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा पाठ के अलावा गाय का गोबर कागज बनाने में भी उपयोग किया जा सकता है.
एमएसएमई मंत्रालय के तहत काम करने वाले खादी ग्रामोद्योग की जयपुर स्थित यूनिट कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (एनएचपीआई) ने तो गाय के गोबर (cowdung) से कागज का उत्पादन शुरू भी कर दिया है.
यही नहीं आगे अब पूरे देश भर में इस प्रकार के प्लांट लगाने की योजना सरकार ने बना ली है.
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पहला पेपर बैग हो गया लॉन्च
खुद केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री गिरिराज सिंह ने 12 सितंबर को कुमारप्पा नेशनल हेंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट में गोबर से बने पेपर कैरी बैग को लॉन्‍च कर चुके हैं
इस दौरान उन्‍होंने गाय के गोबर की अहमियत बताते हुए कहा कि इससे बने उत्पाद गुणवत्ता में काफी बेहतर हैं और किफायती भी हैं.
उन्होंने बताया कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का ही परिणाम हैं कि आज किसान गाय के गोबर से भी पैसा कमा रहे हैं.
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अधिकारियों को गोबर से कागज बनाने की यूनिट लगाने के प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर मंत्रालय भेजने का निर्देश भी दिया है ताकि ये प्रोजेक्‍ट लैब से निकलकर जमीन पर आ सके

Paper Makes From Cowdung

बढ़ेगी किसानों की आय
यह स्कीम किसानों की आय को दोगुना करने के लिए लाई जा रही है. उन्होंने बताया कि कागज एवं विजिटेबल डाई बनाने के लिए सरकार 5 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किसानों से गोबर खरीदेगी.
औसतन एक जानवर एक दिन में 8-10 किलोग्राम गोबर करता है ऐसे में, किसानों को अपनी मवेशियों से रोजाना कम से कम 50 रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है.
15 लाख में लग जाएंगे ये प्लांट
गोबर से कागज बनाने वाले प्लांट लगाने में 5 से 15 लाख रुपये का खर्च आएगा. एक प्लांट से एक माह में 1 लाख कागज के बैग बनाए जा सकते हैं इसके अलावा वेजिटेबल डाई भी इसी प्लांट में बनाया जा सकता है.
इसके लिए छोटे कारोबारी सरकार से लोन के रूप में मदद भी ले सकते हैं.
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और भी कई काम आ रहा है गोबर
केवीआईसी के चेयरमैन वी.के. सक्सेना ने अंग्रेजी वेबसाइट मनी भास्कर को बताया कि गोबर से कागज बनाने के साथ वेजिटेबल डाई बनाने का भी काम किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि गोबर में से कागज बनाने लायक सिर्फ 7 फीसदी मैटेरियल निकलते हैं बाकी के 93 फीसदी का इस्तेमाल वेजिटेबल डाई बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है जो कि पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल होते हैं.
इसके अलावा इलाहाबाद जिले के कौड़िहार ब्लॉक के श्रींगवेरपुर में स्थित बायोवेद कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान शोध संस्थान में गोबर से बने कई अन्य उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है जिसमें गोबर से बने गमले और अगरबत्ती मुख्य रूप से शामिल हैं.
संस्‍थान के प्रबंध निदेशक डॉ. हिमांशू द्विवेदी बताते हैं कि हमारे यहां गोबर की लकड़ी भी बनाई जाती है, इसे गोकाष्ठ कहते हैं.
इसमें लैकमड मिलाया जाता है, ताकी ये ज्यादा समय तक जलती रही गोकाष्ठ के साथ ही गोबर का गमला भी काफी लोकप्रिय हो रहा है.