क्या होगा जब अमेरिका और रूस के बीच टूट जाएगी INF परमाणु संधि

US Russia INF Nuclear Arms Treaty

US Russia INF Nuclear Arms Treaty : समझौता रद्द होने को बाद दोनों देश फिर न्यूक्लियर हथियार बनाने की रेस करने लगेंगे

US Russia INF Nuclear Arms Treaty : अपने बेबाक फैसले के लिए जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर अपने निर्णय से दूनिया में भूचाल ला दिया है.

दरअसल अमेरिका ने रूस के साथ पूर्व में हुए इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (आईएनएफ)समझौते से अलग होने का फैसला कर लिया है.
आज अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद पुष्टि कर दी है कि अमेरिका अब परमाणु हथियार संधि (आईएनएफ) को खत्म करेगा.
बता दें कि सोमवार को ही राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस पर संधि के उल्लंघन को लेकर कई आरोप लगाते हुए खुद को इससे  अलग होने का अल्टिमेटम रूस को दे चुके थे.
पढ़ें – कौन है राकेश अस्थाना, जिनकी वजह से CBI अपने ही दफ्तर पर छापे मारने को हुई मजबूर
क्या कहती है यह संधि 
अमरीकी राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन और अंतिम सोवियत नेता मीखाइल गोर्बाचोफ़ ने आईएनएफ़ संधि पर उस वक़्त साइन किया था जब दोनों देशों के बीच शीत युद्ध का अंत चल रहा था. 
दरअसल इस संधि के लागू होने के दौरान ना तो अमेरिका और ना ही रूस 500 से लेकर 5,500 किलोमीटर की रेंज वाली मध्यम दूरी की मिसाइलों का निर्माण, तैनाती और परीक्षण कर सकता है.
खुद के परमाणु हथियार बनाएगा अमेरिका
संधि के खत्म होने की बात कहते हुए राष्टपति ट्रंप ने कहा है की अमेरिका खुद के परमाणु हथियार बनाएगा और वो भी तबतक जबतक सबको होश नहीं आ जाता उन्होंने यह तक कह दिया है कि वो इस संधि को तोड़ भी सकते हैं.
ट्रम्प से साफ़ कहा है “यह धमकी है आप इसमें जिसे चाहे उसे शामिल कर सकते हैं. चाहे आप इसमें चीन को शामिल करें, चाहे रूस को. इसमें वे सब आते हैं जो खेल खेलना चाहते हैं. समझौते की भावना का पालन नहीं किया गया है”
रूस बातचीत को तैयार लेकिन… 
रूस इस मामले में बातचीत करने को तैयार है लेकिन रूस ने यह भी साफ़ कहा है कि यदि अमेरिका हथियार बनाएगा तो इसका जवाब हथियार से ही मिलेगा.
पढ़ें – UNHRC में भारत की जीत का क्या है मतलब, कुछ फायदा होगा ?
यदि अमेरिका के संधि तोड़ी तो क्या होगा ? 
ट्रम्प के क़दमों से अगर अमेरिका ने यह संधि तोड़ दी तो एक महायुद्ध होने की संभावनाएं हैं, जहां अमेरिका खुद को सबसे शक्तिशाली दिखने के लिए परमाणु हथियार बनाएगा वहीं चीन और रूस भी अमेरिका के खिलाफ खुलकर हथियार बना पाएंगे.
सिर्फ अमेरिका रूस और चीन ही नहीं बल्कि अन्य देशों को भी इससे मनोबल मिलेगा और वो भी अपने यहां न्यूक्लियर हथियार बनाना शुरू कर देंगे.
ऐसे में युद्ध हुआ तो पूरे विश्व को इसकी मार झेलनी पड़ सकती है क्योंकि इन्हीं देशों से कई तरह के आयात होते हैं. हो सकता है यह एक तृतीय विश्व युद्ध भी बन सकता है.
भारत किसका साथ देगा ? 
इसमें कोई दोहराय  नहीं कि पीएम मोदी  सबसे पहले रूस का ही साथ देंगे लेकिन यदि सत्ता बदलती है तो पाशा पलट सकता है और हो सकता है कि भारत अमेरिका की तरफ से आगे आ जाए.