महज 10 सैकेंड में कैंसर का पता लगाने वाले पेन का हुआ अविष्कार

कैंसर
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कैंसर जैसे घातक रोग के बारे में महज कुछ सैकेंड में पता लगाने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अदभूत खोज की है.
अमेरिका के टैक्सास यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे पेन का अविष्कार किया है जो महज 10 सैकेंड में शरीर के अंदर कैंसर के लक्षणों का पता लगा लेगा. .
आपको बता दें कि अभी की प्रक्रिया के अनुसार डॉक्टरों को कैंसर के लक्षण को पता लगाने में 30 मिनट से 1 घंटे तक का समय लग जाता है. जबकि कई बार तो ऐसा भी हो जाता है कि संक्रमित टिश्यू का सही पता भी नहीं चल पाता. जिसके चलते मरीज के इलाज में देरी हो जाती है और उसकी मौत के चांससेस बढ़ जाते है.
इस पेन रूपी डिवाइस के आने के बाद डॉक्टर अब कैंसर का इलाज और बेहतर तरीके से तेजी के साथ कर सकते हैं.
कैसे काम करता है ये पेन
इस पेन को उस जगह रखा जाता है जहां कैंसर होने की संभावना अधिक होती है, पेन से पानी की एक छोटी सी बूंद निकलती है.
इसके बाद जीवित कोशिकाओं के भीतर मौजूद रसायन पानी की उस बूंद की तरफ जाने लगता है, जिसे परीक्षण के लिए पेन वापिस सोख लेता है.
इस पेन को स्पेट्रोमीटर से जोड़ा गया है, यह स्पेट्रोमीटर प्रत्येक सैकेंड में हज़ारों रसायनों के द्रव्यों को आसानी से माप सकता है.
इस पेन की मदद से एक प्रकार का रसायनिक फिंगरप्रिंट तैयार हो जाता है जो डॉक्टर को यह पहचानने में मदद करता है कि टिश्यू में कैंसर है या नहीं.
गौरतलब है कि डॉक्टरों के लिए एक सामान्य और कैंसर वाले टिश्यू में अंतर कर पाना काफी मुश्किल काम रहता है. लेकिन इस पेन की मदद से यह काम काफी हद तक आसान हो जाएगा.
यूनिवर्सिटी की रसायन विज्ञान की असिसटेंट प्रोफेसर बताती हैं कि इस डिवाइस की सबसे अच्छी बात है कि यह बड़ी ही आसानी से कैंसर टिश्यू की पहचान कर लेता है. इसके साथ ही इसे इस्तेमाल करने में भी बहुत आसानी होती है.
साइंस ट्रांस्लेशनल मेडिसिन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस पेन का परीक्षण 253 सैम्पल पर किया जा चुका है. जिसमें इस डिवाइस के टेस्ट को 96 प्रतिशत सही बताया गया है.
फिलहाल इस पेन के ज़रिए 1.5 मिलिमीटर तक छोटा टिश्यू पहचाना जा सकता है.
कयास लगाया जा रहा है कि इस डिवाइस को अगले साल तक प्रयोग में लाया जाएगा.

वैसे तो इससे पहले भी कई यूनिवर्सिटियों ने कैंसर के इलाज से जुड़े कई डिवाइस बनाए हैं.

हाल ही में लंदन के इम्पीरियल कॉलेज में ही एक ऐसे चाकू की खोज की गई थी जिसकी मदद से कैंसर की पहचान की जा सकती है.