बांग्लादेश पलायन करने वाले रोहिंग्या मुस्लमानों की संख्या 1,23,000 पहुंची- यूएनएचसीआर

रोहिंग्या
रोहिंग्या मुस्लिम महिलाएं
बौद्ध बहुसंख्यक आबादी वाले म्यंमार में हिंसा के चलते बांग्लादेश पलायन करने वाले रोहिंग्या मुस्लमानों की संख्या 1,23,000 हो गई है.
यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर की प्रवक्ता विवियन तान ने दुनिया से साझा की है.
म्यंमार में रोहिंग्या मुस्लमानों के खिलाफ भड़की हिंसा के चलते हजारों की संख्या में लोग जंगलों और धान के खेतों से होते हुए बांग्लादेश में सुरक्षित पहुंच रहे हैं. जबकि कुछ लोग दोनों देशों के बीच बहने वाली नदियों को पार करते हुए पहुंच रहे हैं.
हालांकि इसी कोशिश में कई लोगों की मौत डूबने से हो गई.
आपको बता दें कि रोहिंग्या समुदाय का ताजा पलायन 25 अगस्त से शुरू हुआ. जब रोहिंग्या उग्रवादियों ने म्यामांर की पुलिस चौकियों पर हमला कर दिया. जिसके बाद वहां कि सरकार ने सुरक्षा बलों को इसके जवाब में अभियान चलाने का आदेश दे दिया है.
गौरतलब है कि म्यामांर में साल 2002 में हुई हिंसा के बाद एक लाख से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश के शिविरों में रहने को मजबूर हैं. और 25 अगस्त के बाद रोजाना हजारों की संख्या में लोग बांगलादेश की सीमा में दाखिल हो रहे हैं
एक अनुमान के मुताबिक म्यंमार में 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं. इन मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वो मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी है जो जबरदस्ती म्यंमार में रह रहे हैं.
म्यंमार सरकार ने उन लोगों को साफ-तौर पर अपने देश की नागरिकता देने से मना कर दिया है. लेकिन इन मुसलमानों का दावा है कि वो यहां कई पीढ़ियों से रह रहे हैं,जिसे लेकर दोनों समुदायों के बीच वर्षों से मतभेद चल रहा है.
वहीं इस गतिरोध की शुरआत वाले रखाइन स्टेट में 2012 से सांप्रदायिक हिंसा जारी है. इस हिंसा में अब तक कई लोगों की जानें जा चुकी हैं और 1 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं.
 संयुक्त राष्ट्र ने भी रोहिंग्या मुस्लमानों को पश्चिमी म्यांमार का धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक बताया हुआ है. इसके साथ ही  उसने यह भी टिप्पणी की है कि रोहिंग्या मुस्लमान दुनिया के सबसे सताए हुए अल्पसंख्यक हैं.

भाषा के इनपुट से