खबरदार! उत्तराखंड में गरीब लड़कियों की शादी का ढोंग रच, कराई जा रही मानव तस्करी

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अगर किसी गरीब की बेटी का कोई कन्यादान या शादी कराना चाहता है, तो उससे खबरदार हो जाइए.. क्योंकि हो सकता है कि वह कन्यादान के सहारे उस लड़की को देह व्यापार के धंधे में धकेलने की साजिश रच रहा हो.
यही वजह है कि अपनी सादगी के लिए जाना जाने वाले उत्तराखंड राज्य के सीधे-साधे लोग इन दिनों सबसे ज्यादा मानव तस्करी का शिकार हो रहे हैं.
इसकी तस्दीक खुद राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंत्यूरा ने की है.
शादी का झांसा देकर देह व्यापार में धकेल रहे
1 सितंबर 2017 को उत्तराखंड महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंत्यूरा अपनी टीम के साथ उत्तराखंड के सीमांत जनपद उत्तरकाशी के दुर्गम क्षेत्रों के भ्रमण पर निकली.
लगभग एक सप्ताह के भ्रमण में आयोग की अध्यक्ष ने देखा कि बाहरी राज्यों के लोग गरीब की बेटी का अच्छे परिवार में शादी कराने में खूब रूचि ले रहे हैं.
गरीब की बेटी का शादी का खर्च भी खुद उठाया जाता है. इसके बाद गांव की बेटियों को बड़ी कार में बैठाकर विदाई करा दी जाती है. सब कुछ देखने में बहुत सुकून भरा लगता है. लेकिन इसकी तह तक जाने पर जो नजारा सामने आता है, वह मानवता को शर्मसार करने वाला है.

बहरूपया का पता लगाना नामुमकिन

बाहरी राज्य के लोग पहले तो दुर्गम क्षेत्रों में ऐसे गरीब घरों की पहचान करते हैं जहां लड़की हो. इसके बाद वो उस घर के बड़े बुजुर्गों से नजदीकियां बढ़ाते हैं.
धीरे-धीरे वो उनकी सहायता करने के बहाने उनका विश्वास जीत लेते हैं. इसके बाद वो उनकी बेटी का संपन्न और अच्छे घर में विवाह कराने का झूठा सपना दिखाते हैं. पहाड़ के लोग इतने सीधे होते हैं कि वो उन लोगों की चाल का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं लगा पाते
गरीबी का उठाते हैं फायदा
तस्कर लोग पहाड़ी क्षेत्र की गरीबी का खास फायदा उठाते हैं. वह गरीब घर की लड़कियों को शहर की हाई-फाई लाइफ के सपने दिखाते हैं. उनके सामने बड़ी कारें लाकर अपना हाई लिविंग स्टैंडर्ड दिखाते हैं. जिससे लड़कियों के मन में सपने जगने लगते हैं.
शादी के बाद लड़की का नहीं हो पाता संपर्क
बाहरी राज्यों से आए लोग गांवों की गरीब लड़कियों की शादी तो करा देते हैं, लेकिन शादी कराने के बाद वो ना खुद गांव वापस आते हैं ना ही गांव की लड़की का उसके परिवार के साथ कोई संपर्क हो पाता है. पीड़ित परिवारजनों ने बताया कि वह किस हाल में है, जिंदा भी है या नहीं, उन्हें कुछ नहीं पता चल पाता.
किन-किन राज्यों में होती है तस्करी
उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव तस्करों के लिए सबसे लाभकारी साबित होता है. यही कारण है कि यहां धीरे-धीरे मानव तस्करी में इजाफा देखने को मिल रहा है.
सरोजनी कैंत्यूरा ने बताया कि उनके पास ऐसे छह मामले आए हैं, जिनमें दो बिहार, दो हरियाणा, एक राजस्थान और एक उत्तर प्रदेश का है.
उत्तराखंड की 120 लड़कियां लापता
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से करीब पिछले दस वर्षों में 120 लड़कियां लापता हैं, जिनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है. अंदेशा लगाया जा रहा है कि ये लड़कियां भी मानव तस्करी का शिकार हुई हैं.
सामाजिक संगठन भी लिप्त
पूरे भारत में मानव तस्करी की रोकथाम के लिए काम कर रही इम्पावर पिपुल्स के संस्थापक ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि उनके पास सैकड़ों ऐसे मामले हैं जिनमें लड़की की तस्करी में सामाजिक संगठनों की भी मुख्य भूमिका  रही है.
उन्होंने बताया कि सामाजिक संगठन अपनी छवि बनाने के लिए गरीब की बेटी की शादी तो करा देते हैं, लोग उनकी खूब सराहना भी करते हैं. लेकिन इस सराहना के पीछे उनकी काली करतूत छिपी होती है.
वह उस गरीब लड़की का विवाह बाहरी राज्यों के लड़कों के साथ करा देते हैं, और शादी के बाद लड़की से माता-पिता का कोई संपर्क नहीं कराया जाता. माता-पिता के द्वारा उनके लड़की के बारे में पूछने पर हर बार यही कहा जाता है कि लड़की बहुत खुश है.