कर्नाटक के 2,023 गांवों में आज तक एक भी व्यक्ति ग्रेजुएट नहीं

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कर्नाटक राज्य में 27,530 गांवो में 2,023 गांव ऐसे हैं जहां आज तक एक भी व्यक्ति ग्रेजुएट नहीं है. एक अध्ययन से पता चला है कि इन गांवों में आज तक अपनी ग्रेजुएट स्तर की पढ़ाई पूरी करने वाले एक भी व्यक्ति को नहीं देखा गया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया पर छपि खबर के मुताबिक अब तक इन गांवों में एक भी ग्रेजुएट ना होने के कारण राज्य सरकार ने  कॉलेज छोड़ने वाले को वापस लाने के लिए तीन दिवसीय अभियान की शुरूआत की है. ये चौंकाने वाली जानकारी कॉलेजिएट एजुकेशन (डीसीई) के निदेशालय द्वारा नियुक्त एक अध्ययन से सामने निकल कर आई है. जिसे अब राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है.
राज्य के हालात तब ऐसे बने हुए हैं जब कर्नाटक सरकार उच्च शिक्षा पर प्रतिवर्ष 3,000 करोड़ रूपये खर्च कर रही है.
अध्ययन के अनुसार इन शून्य ग्रेजुएट वाले गांवों में जनसंख्या लगभग 2,900 लोगों तक होती है.जिन जिलों के गांवों में सबसे ज्यादा संख्या शून्य में हैं वो इस प्रकार हैं कोलार (211 गांव), तुमकुरु (190 गांव), उत्तर कन्नड़ (166), हसन (16 9), रायचूर (144), मायसूर (113), शिवमोग्गा ( 98), चिकबल्लापुरा (9 0), बेलगांव (68) और बेंगलुरु ग्रामीण (66).
डीसीई के एक अधिकारी ने कहा कि युवाओं ने पहाड़ी इलाकों और अधिकांश पिछड़े क्षेत्रों में पढ़ाई को बंद कर दिया है ये समझा जा सकता है. मगर कोलार और तुमकुरु के इतने सारे गांव इस लिस्ट में शामिल हैं. जो कि राजधानी बेंगलुरू के पास होने के बावजूद भी यहां इतनी बेकार हालत है.
उन्होंने कहा कि यह सच है कि राज्य में साक्षरता दर 75.70 फीसदी तक पहुंच गई है. मगर इन गांवों के युवाओं का ग्रेजुएट तक की पढ़ाई ना करना भी एक गंभीर चिंता का विषय है.
इस अभियान की शुरूआत में सरकार ने सबसे पहले 1,000 गांवों की पहचान की है. और इन गांवों के निकट सरकारी कॉलेजों में एक लेक्चरर को नियुक्त किया गया है. ताकि वो पास के गावों का आसानी से दौरा कर तथ्यों का सही पता लगा सके.
अधिकारी ने बताया कि बाकि बचे हुए गांवों में इस अभियान की शुरूआत अगले साल से की जाएगी .