टीवी शोज का सफल कैरियर छोड़ बिहार के अपने गांव में खेती करने पहुंच गया ये एक्टर

Actor Left Acting Make Village Smart
राजेश कुमार

Actor Left Acting Make Village Smart : गांव को स्मार्ट बनाने की कर रहें है कोशिश

Actor Left Acting Make Village Smart : हमारे बॉलीवुड में ऐसे बहुत से लोग हैं जो ग्लैमर के साथ साथ जमीन से भी जुड़े हुए हैं और समय समय पर समाज सेवा के लिए आगे भी आते रहे हैं.

कहते हैं बॉलीवुड की दुनिया बहुत बड़ी है यहां आपको हर तरह के लोग मिल जाएंगे, शायद ये सच भी है क्योंकी आज हम आपको एक ऐसे एक्टर की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने अपना सफल करियर छोड़ कर खुद को किसी दूसरे सामाजिक काम के प्रति त्तपर कर दिया हैं.
साराभाई vs साराभाई सीरीयल शायद आप सभी को याद होगा जो एक समय का सबसे लोक प्रिय हांस्य सीरीयल हुआ करता था.
लंबे समय तक इस शो ने हमारे दिल और घरों में जगह बना कर रखी थी, फिर तो इस सीरीयल में रेशोश साराभाई का रोल निभाने वाले एक्टर राजेश कुमार भी आपको याद ही होंगे जो अपनी मासूम चेहरे पर सख्त आवाज की बनावट से हमेशा दर्शकों को खूब हंसाया करते थे
आपको बता दैं कि आज कल वो मुंबई से दूर अपने गृह राज्य बिहार की राजधानी पटना से 125 कीमी दूर बर्मा गांव में अपने दिन बिता रहे हैं.
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दरअसल पटना में पैदा हुए राजेश के मुताबिक, वे एक बार पेड़ के नीचे बैठे थे तभी उनके मन में एक आइडिया आया कि बर्मा गांव की हालत सुधारने में उन्हें कुछ मदद करनी चाहिए.
जिसके बाद वो अपने गांव पहुंच गए मगर गांव जाते ही उन्होंने देखा कि वहां पानी, बिजली जैसी कोई भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं .

Actor Left Acting Make Village Smart

इसके बाद उन्होंने गांव को स्मार्ट बनाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए राजेश वहां बिजली-पानी की व्यवस्था के लिए अधिकारियों से मिले.
घर में जानवरों का दूध निकालना, घास काटना, खेती करने के साथ-साथ वो घर के सभी काम करने लगे जो एक ग्रामीण के जीवन का मुख्य हिस्सा रहता है.
यहीं नहीं उन्होंने वहां शून्य बजट खेती की भी शूरूआत करी जिससे ना सिर्फ उन्हें बल्कि गांव के सभी किसानों को भी फायदा पहुंचा.
क्या है शून्य बजट खेती
शून्य-बजट आध्यात्मिक खेती प्रकृति, विज्ञान, आध्यात्म एवं अहिंसा पर आधारित खेती की तकनीक है. इस तकनीक में रासायनिक खाद, केंचुआ खाद एवं जहरीले रासायनिक-जैविक केमिकल नही खरीदने होते बल्कि केवल एक देसी गाय से 30 एकड़ तक की खेती की जा सकती है.
इस तकनीक में केवल 10% पानी एवं 10% बिजली की जरूरत होती है, मतलब 90% पानी एवं बिजली की बचत हो जाती है.
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कैसे पहुंचे थे मुंबई
गौरतलब है कि राजेश वर्ष 1998 में अपनी प्रेग्नेंट बहन की देखभाल के लिए मुंबई पहुंचे थे.
बिहार से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो मुंबई के एक्स जेवियर कॉलेज से मास कम्नीकेशन की पढ़ाई करना चाहते थे. इस बीच उन्हें एक फ्रेंड के शो में एक छोटा सा रोल निभाने का ऑफर मिल गया और यह शो बेस्ट सेलर रहा.
इस शो में राजेश को सिर्फ इतना कहना था कि, “हैप्पी एनिवर्सरी कांग्रेचुलेशन… ये रही आपकी टिकट”, लेकिन इतना बोलने के लिए भी राजेश ने 20 रीटेक लिए जिसके लिए उन्हें 1000 रुपए मिले थे.
आज राजेश कुमार को टेलीविजन इंडस्‍ट्री में करीब 19 साल हो चुके हैं और इस दौरान उन्‍होंने एक से बढ़कर एक किरदार निभाए हैं जो दर्शकों के जहन में आज भी मौजूद है.