जानिए किस फसल के लिए कौन सी मिट्टी होती है सबसे लाभदायक

Best Soil For Farming
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Best Soil For Agriculture : ये मिट्टी अलग-अलग फसलों के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण होती है.

Best Soil For Agriculture : कृषि प्रधान देश कहे जाने वाले भारत में आधी जनसंख्या खेती पर ही निर्भर रहती है,हालांकी बदलते वक्त के साथ इसमें कई तरह की चुनौतियां किसानों के सामने आ रही हैं लेकिन फिर भी वो इस पर डिगे हुए हैं.

हमारे देश के विभिन्न कोनों में अलग-अलग तरह की मिट्टियाँ पाई जाती हैं, ये मिट्टी अलग-अलग फसलों के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण होती है.
भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की मिट्टियों का समय-समय पर  कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के द्वारा सर्वेक्षण किया जाता रहता है. 
अगर हम हमारे देश में मौजूद मिट्टी के प्रकारों की बात करें तो यहां मुख्य रूप से निम्न प्रकार की मिट्टी पाई जाती है.
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हमारे देश में मुख्यरूप से जो मिट्टियां पाई जाती है हैं वो हैं, जलोढ़ मिट्टी, काली मिट्टी, लाल मिट्टी, लैटराइट मिट्टी, शुष्क मिट्टी, पर्वतीय मिट्टी.
ये सभी मिट्टी अपने जगह-जगह के जलवायु के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. तो आइए आज जानते हैं कि कौन सी खेती के लिए किस तरह की मिट्टी का होना ज़रूरी होता है…
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जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) :
जलोढ़ मिट्टी को कछार मिट्टी के नाम से भी जाना जाता है. इस मिट्टी को नदियाँ अपने साथ बहाकर ले आती हैं.
एक वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक देश के कुल भूमि क्षेत्र का करीब 15 लाख वर्ग किमी या 35 प्रतिशत हिस्से में यही मिट्टी पाई जाती है, यूं कहें की देश की लगभग आधी कृषि जलोढ़ मिट्टी पर होती है.
प्राकृतिक रूप से इस मिट्टी को काफी उपजाऊ माना जाता है यह मुख्यता गंगा, सिन्धु और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा लाई जाती है.
यह उपजाऊ मिट्टी राजस्थान के उत्तरी भाग, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम के आधे भाग में पाई जाती है.
जलोढ़ मिट्टी में उपजाई जाने वाली फसलें हैं, तंबाकू, कपास, चावल, गेहूं, बाजरा, ज्वार, मटर, लोबिया, काबुली चना, काला चना, हरा चना, सोयाबीन, मूंगफली, सरसों, तिल, जूट, मक्का, तिलहन फसलें, सब्ज़ियां और फल. 
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काली मिट्टी (Black Soil)
 काली मिट्टी की एक सबसे बड़ी विशेषता ये होती है कि ये मिट्टी अपनी नमी को काफी समय तक बनाये रखने में सक्षम होती है. 
इस मिट्टी को कपास की मिट्टी या रेगड़ मिट्टी भी कहते है ये बेसाल्ट चट्टानों के टूटने और इसके लावा के बहने से बनती है.
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कपास की खेती के लिए काली मिट्टी काफी उपजाऊ मानी जाती है इस मिट्टी में लाइम, आयरन, मैग्नेशियम और पोटाश होते हैं.
इस मिट्टी का काला रंग टिटेनीफेरस मैग्नेटाइट और जीवांश (ह्यूमस) के कारण होता है. यह मिट्टी लावा प्रदेश में पाई जाती है जो की गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत आंध्र प्रदेश के पश्चिमी भाग में आता है.
काली मिट्टी में उगाई जाने वाली फसलें हैं, कपास, गन्ना, गेहूं, ज्वार, सूरजमुखी, अनाज की फसलें, चावल, खट्टे फल, सब्ज़ियां, तंबाखू, मूंगफली, अलसी, बाजरा व तिलहनी.
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लाल और पीली मिट्टी(Red or Yellow Soil)

 लाल मिट्टी चट्टानों से कटी हुई मिट्टी को कहते है यह अधिकतर भारत के दक्षिणी भू-भाग पर मिलती है.
यह मिट्टी कुछ रेतीली होती है और इसमें अम्ल और पोटाश की मात्रा अधिक होती है जबकि इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और ह्यूमस की कमी होती है.
लाल मिट्टी का लाल रंग आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है, लेकिन जलयोजित रूप में यह पीली दिखाई देती है.
इस मिट्टी का क्षेत्र महाराष्ट्र के दक्षिणी भू-भाग में, मद्रास में, आंध्र में, मैसूर में, झारखंड के छोटा नागपुर व पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों तक फैली हुई है.
लाल और पीली मिट्टी में उगाई जाने वाली फसलें हैं, चावल, गेहूं, गन्ना, मक्का, मूंगफली, रागी, आलू, तिलहनी व दलहनी फसलें, बाजरा, आम, संतरा जैसे खट्टे फल व कुछ सब्ज़ियां.
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लैटराइट मिट्टी(Laterite Soil)
 लैटराइट मिट्टी, दक्षिणी प्रायद्वीप के दक्षिण पूर्व की ओर पतली पट्टी के रूप में मिलती है.
इस मिट्टी को प्राय पश्चिम बंगाल से लेकर असम के क्षेत्रों तक देखा जाता है, लैटराइट मिट्टी मानसूनी जलवायु के शुष्क और नम होने का जो परिवर्तन होता है उससे बनती है.
इस मिट्टी में अम्ल और आयरन ज़्यादा होता है और ह्यूमस, फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, कैल्शियम की कमी होती है. इस मिट्टी को गहरी लाल लैटेराइट, सफेद लैटेराइट और भूमिगत जलवायी लैटेराइट जैसी श्रेणियों में बांटा जाता है.
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लैटराइट मिट्टी में उगाई जाने वाली फसलें हैं. ये मिट्टी ज्यादा उपजाऊ तो नहीं होती है लेकिन कपास, चावल, गेहूं, दलहन, चाय, कॉफी, रबड़, नारियल और काजू की खेती इस मिट्टी में की जाती है. हाँ लेकिन इस मिट्टी में आयरन की अधिकता होती है इसलिए ईंट बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.
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Cracked earth

शुष्क मिट्टी(Dry Soil)

 शुष्क मिट्टी में रेत की मात्रा ज्यादा होती है और इस तरह की मिट्टी आरावली के पश्चिमी क्षेत्र में पाई जाती है.
इसके अलावा इस मिट्टी में क्ले की मात्रा कम होती है. सूखे वाले क्षेत्रों में ह्यूमस और मॉइश्चर की कमी कारण भी ये मिट्टी शुष्क हो जाती है. ये मिट्टी क्षारीय होती है और इसमें नमक की मात्रा अधिक व नाइट्रोजन की मात्रा कम होती है.
शुष्क मिट्टी में उगाई जाने वाली फसलें हैं, गेहूं, मक्का, दलहन, मक्का, जौ, बाजरा.
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पर्वतीय मिट्टी (Mountainous Soil)

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है कि यह मिट्टी पहाड़ी क्षेत्रों जैसे जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किमअरुणाचल प्रदेश में पाई जाती है.
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इस मिट्टी में ह्यूमस अधिक मात्रा में होता है लेकिन पोषक तत्व जैसे पोटाश, फॉस्फोरस और चूना कम होता है.
पर्वतीय मिट्टी में उगाई जाने वाली फसलें,  चाय, मसाले, गेहूं, मक्का, जौ, कॉफी, कुछ फल.