विलुप्त होती पक्षी के संरक्षण के लिए अरुणाचल के जनजातीय समुदाए को मिला बॉयोडाइवरसिटी अवार्ड

Biodiversity Award 2018
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Biodiversity Award 2018 : इस प्रजाति की पक्षियों की संख्या 14 से 20 है.

Biodiversity Award 2018 : देश में विकास की नई उंचाईयों पर पहुंचकर अक्सर हम ये भूल जाते हैं कि आगे बढ़ने के साथ-साथ हमें अपनी विरासत और पर्यावरण को बचाने की भी कोशिश करनी चाहिए,क्योंकी इस विकास की आंधी में सबसे ज्यादा नुकसान इन्ही दोंनो को हो रहा है.

अरुणाचल प्रदेश के एक समुदाय के कुछ लोगों ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए अपने कामों की वजह से सभी को ये संदेश दिया है कि हम इंसानों को विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूर करना चाहिए.
दऱअसल अरुणाचल प्रदेश के एक समुदाय ने विलुप्त होती पक्षी – बगुन लियोसिचला को बचाने का प्रयास किया है जिसके लिए उसे इस साल इंडिया बॉयोडायवर्सिटी पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है.
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अरुणाचल प्रदेश की सिंगचंग बगुन ग्राम कम्युनिटी रिजर्व मैनेजमेंट कमेटी (एसबीवीसीआर) को हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय बॉयोडायवर्सिटी दिवस पर प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय में मंगलवार को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
बता दें कि 2006 में अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में बगुन लियोइचला (लिओसिचला बगुनोरम)पक्षी की खोज हुई थी. इस पक्षी का नाम बुगुन जनजातीय समुदाए के नाम पर रखा गया है क्योंकी इसने ही इसकी सुरक्षा की जिम्मादारी उठाई हुई है.
इस प्रजाति की पक्षियों की संख्या 14 से 20 जो 2,200 मीटर के क्षेत्र में रहते हैं और ये इलाका पूरी तरह से सिंगचुन बुगुन के अंडर में आता है
 गौरतलब है कि सिंगचुन बुगुन गांव पिछले साल 6 फरवरी को अरूणाचल प्रदेश के वन विभाग की कोशिशों के बाद बनाया गया था.
इस समुदाय के 10 लोग हर दिन अपने क्षेत्र का पैदल मार्च करते हैं जो हर तरह के अवैध निर्माण और उस तरह के कार्य करने वालों को रोकते हैं जिससे इलाके के पक्षी-पशुओं को परेशानी हो.
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पिछले पांच साल में 12 स्कूलों के 400 से ज्यादा बच्चे इस समुदाय के वाइलडलाइफ कैंप का हिस्सा बनकर बगुन पत्री की सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरुक कर रहे हैं.
यही नहीं एसबीवीसीआर सिर्फ पर्यावरण को बचाने का काम नहीं कर रही बल्कि वो वहां के लोकर लड़को को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार मुहैया कराने में भी मदद कर रही है.