अब फसल के कचरे से किसान बन सकेंगे लखपति, प्रदूषण से भी मिलेगी मुक्ति

Punjab Farmer's Start-up Earn For Crop Residue

Punjab Farmer’s Start-up Earn For Crop Residue : पर्यावरण को साफ और हरा बनाने के साथ साथ आमदनी का नया श्रोत भी है.

Punjab Farmer’s Start-up Earn For Crop Residue : वातावरण में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए काफि लंबे समय से भारत की सरकारें किसानों से यह निवेदन कर रही है कि वह कृषि के बचे हुए पदार्थों यानि की पराली को ना जलाए.

लेकिन इसका कुछ खसर असर कहीं भी देखने को नहीं मिल रहा है इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह किसानों के पास  अच्छा विकल्प ना होना है. मगर लगता है अब शायद जल्द ही इसका हल होता दिख रहा है.
30 से अधिक वर्षों से खेती कर रहे पंजाब के सुखबीर ढलीवाल और कमलजीत सिंह ने फसल के बाद बचे हुए अवशेष को जलाने की बजाए उसे मैनेज करने के लिए एक स्टार्ट-अप लेकर आए हैं.
उनका ये स्टार्टअप खेत में बचे हुए फसल के अवशेष से बायोकोल(Biocoal) बनाने का काम करेगा, इससे ना केवल पर्यावरण प्रदूषित होने से बचेगा बल्कि किसानों की आमदनी भी होगी.
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इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में धलीवाल ने बताया कि उनके पास सम्राला में 4.5 एकड़ की जमीन है जहां वो खेती करते थे और अधिकांश किसानों की तरह वो भी पहले फसल के बाद उसके अवशेष को जला देते थे.
लेकिन फिर पराली जलाने के दौरान पर्यावरणीय खतरों को समझते हुए वो और उनके दोस्त कमलजीत सिंह ने इसके बारे में सोचना शुरू किया.
और आखिर में उन्होंने इसका तोड़ निकालते हुए साल 2016 और 2017 में  फसल अवशेष एकत्र करके उसे बॉयोमास और सीमेंटिंग कंपनियों को बेचना सुरू किया जहां वो इसे बॉयोफ्यूल ईंधन की तरह इस्तेमाल करते थे.
ढलीवाल ने कहा कि इन दो सालों में उनको 30-35 लाख का फायेदा हुआ. उन्होंने बताया कि उनका स्टार्टअप एक नया उद्योग है, जिसमें पर्यावरण को साफ और हरा बनाने के साथ साथ आमदनी का नया श्रोत भी है.
ढालीवाल बताते हैं कि पिछले 3 सालों में स्टार्टअप की लुधियाना, पटियाला और आसपास के स्थानों में 12,000 एकड़ जमीन तक पहुंच हो गई है यानि की वो इतने एरिया का फसल अवशेष अब कंपनियों को बेचते हैं.
गौरतलब है कि कृषि भूमि को इस तरह से साफ करने में लगभग 7,000 रुपये प्रति एकड़ का खर्च आता है, लेकिन ये लोग इस काम के लिए किसानों से कोई पैसा नहीं लेते ताकी किसानों को अगली फसल को लेकर मुश्किल ना हो.
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यूरोप भेजे गए नमूने
बता दें कि थर्मल संयंत्र में इस्तेमाल के लिए 2 टन बॉयोकोल यूरोप भी भेजा गया है जहां से अभी प्रतिक्रिया आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
यही नहीं 2016 में सम्राला में मानकी गांव में Farm2Energy नाम से शुरू हुई ये कंपनी आने वाले दिनों में राष्ट्रीय थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) के लिए भी बोली लगाने की कोशिश कर रही है.