नोटबंदी से बेहाल हुए थे किसान, ना खरीद सके बीज और ना बेच सके फसल – मंत्रालय

Farmers Hits Badly Demonetization Noteban
भारतीय किसान

Farmers Hits Badly Demonetization Noteban : नकदी की कमी से लाखों किसान रबी की फसलों के लिए खाद्य और बीज नहीं खरीद पाए थे

Farmers Hits Badly Demonetization Noteban : नोटबंदी को लेकर एक तरफ जहां सरकार अपनी कामयाबी की हुंकार भरती रहती है तो वहीं विपक्ष इसे देश की अर्थव्यवस्था पर किया गया घातक हमला

इसके लागू होने के बाद से ही देश में इस बात पर तीखी बहस होती है कि इसका कितना लाभ हुआ और कितना नुकसान.
हाल ही में वित्त मंत्रालय से जुड़ी संसद की एक स्थाई समिति ने माना है कि नोटबंदी की वजह से किसनों के जीवन और खेती पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है.
अंग्रेजी अखबार द हिंदू में प्रकाशति खबर के मुताबिक नोटबंदी की वजह से भारत के लाखों किसान ठंड की फसलों के लिए खाद्य और बीज नहीं खरीद पाए थे क्योंकी उनके पास नकदी की कमी थी.
रिपोर्ट के अनुसार जब नोटबंदी देश में लागू हुई तो उस समय किसान या तो अपनी खरीफ की फसल बेच रहे थे या फिर उन्हें रबी की फसलों की बुआई के लिए बीज खरीदना था.
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यह तो आप सभी जानते होंगे कि इन दोनों कामों के लिए कैश की ज्यादा जरूरत पड़ती है ऐसे में बाजार से बड़े नोट गायब होने की वजह से किसानों के अंदर भारी हताशा उत्पन्न हो गई.
वहीं इसके खराब प्रभाव बड़े किसानों पर भी पड़ा क्योंकी उनके पास भी अपने खेतों में काम करने वाले मजदूरों को मेहनतनामा देने के लिए कैश नहीं था. जिसकी वजह से उनका काम भी जैसे का तैसा वहीं रुक गया.
मंत्रालय ने यह भी कहा कि कैश की कमी के वजह से राष्ट्रीय बीज निगम अपने लगभग 1.38 लाख क्विंटल गेंहू के बीज नहीं बेच सका था.
सबसे हैरानी की बात तो यह थी कि ये स्थिति तब भी नहीं सुधरी जब सरकार ने ये आदेश दे दिया था कि 500 और 1000 के पुराने नोट से भी गेंहू के बीज खरीदे जा सकेंगे.
गौरतलब है कि इस रिपोर्ट को पेश करने के दौरान विपक्ष के सांसदो ने कृषि मंत्रालय के अधिकारियों से कई सवाल पूछे.
सांसदों ने यह जानना चाहा कि क्या सरकार को इस बात की जानकारी थी कि नोटबंदी के बाद जनवरी-अप्रैल 2017 के बीच 15 लाख लोगों की नौकरियां चली गईं.
बता दें कि इस समिति के सदस्यों में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कुल 31 सांसद हैऔर इसकी अध्यक्षता कांग्रेस सांसद विरप्पा मोइली जी कर रहे थे.
बाजार मे मौजूद पहले से ज्यादा कैश
कुछ दिनों पहले RBI ने अपनी एक वार्षिक रिपोर्ट में बैंकों में वापस आए सभी पुराने नोटों का पूरा लेखा जाोखा दिया था.
रिपोर्ट के मुताबिक 8 नवंबर 2016 से पहले तक बाजार में मौजूद 500 और 1000 के सभी नोट में से 99.30 फीसदी वापस आ चुके हैं.
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी इस रिपोर्ट में बताया कि 8 नवंबर, 2016 को 15.41 लाख करोड़ की वैल्यू के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट सर्कुलेशन में थे. इसके बाद इनमें से जितने नोट वापस आए हैं, उनकी कुल वैल्यू 15.31 लाख करोड़ है.
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यानि की इसका मतलब यह हुआ कि बंद नोटों में सिर्फ 10,720 करोड़ रुपये ही बैंकों के पास वापस नहीं आए हैं.
गौरतलब है कि पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों में किसान और नोटबंदी दोनों प्रमुख मुद्दा है, दोनों बड़ी पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस अपने अपने तरह से इसे भुनाने  की कोशिश कर रही हैं.
अब देखना है कि जनता किसकी बातों को अपना समर्थन करती हैं,क्योंकी सर्वो सर्वा तो वहीं है ना.