आज भी भारत के 13,500 गांवों मे नहीं है स्कूल, इसमे भी यूपी आगे

Indian Villages Without School
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Indian Villages Without School : ग्रामीण विकास मंत्रालय का जारी किया हुआ है डाटा 

Indian Villages Without School :  किसी भी देश का भविष्य उसकी बेहतरीन शिक्षा प्रणाली पर टिका हुआ रहता है,यही वजह है कि दुनिया का हर देश चाहता है कि उसके यहां की शिक्षा व्यवस्था सबसे मजबूत रहे.

हमारे भारत में भी हर साल देश की केंद्र और राज्य सरकारें स्कूल और कॉलेज खोलने के लिए अलग अलग करोडों रूपए का बजट तैयार करती हैं. लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका सही उपयोग होता है ?
दरअसल हाल में स्कूलों की मौजूदा संख्या को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है जो भारत सरकार की सर्व शिक्षा अभियान योजना को धक्का देती है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में अभी भी 13,500 ऐसे गांव हैं जहां प्राथमिक स्कूल तक नहीं है.
यहां आपको बता दें कि इस रिपोर्ट को किसी निजी संस्था ने तैयार नहीं किया है बल्कि ये ग्रामीण विकास मंत्रालय का जारी किया हुआ डाटा है.
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यूपी के गांवों की संख्या ज्यादा
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले में यूपी सबसे पीछे है क्योंकी अन्य राज्यों के मुकाबले यहां के गावों की संख्या ज्यादा है जहां अब तक कोई स्कूल नहीं खुल सके हैं.
वहीं संख्याओं के संदर्भ में, मिजोरम एकमात्र ऐसा राज्य है जहां हर गांव में एक स्कूल है.
गौरतलब है कि इस मामले में पूर्वोत्तर राज्यों का प्रदर्शन देश के बाकी हिस्सों से काफी बेहतर है. वहां का केवल मेघालय ही ऐसा राज्य है जहां 41 गांवों में स्कूल नहीं है.
क्या हो सकती है वजह
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मंत्रालय के एक अधिकारी ने इसके पीछे कई कारणों का जिक्र किया.
जिसमें पहला राज्य सरकारों का स्कूलों के निमार्ण और रखरखाव के पीछे ढीला रवैया रखना हो सकता है. जबकि दूसरा देश में ऐसे भी कई गांव है जहां स्कूल की स्थापना के लिए पर्याप्त मानव आबादी नहीं है.
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ग्रामीणों को सोच भी बनती है अडंगा
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट हैदराबाद के प्रोफेसर एच एस सोलंकी का इस बारे में अलग तर्क हैं.
उनका मानना है कि अभी भी ग्रामीण लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाए उनसे खेती या कुछ पैसे कमवाने पर ज्यादा दबाव देते हैं.
ऐसे में सरकार के लिए उन्हें समझाना मुश्किल हो जाता है कि वो अपने बच्चों का इन सब कामों की बजाए स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजें.
खैर इस रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के पीछे कई कारण हो सकतें हैं लेकिन सरकार को इन निष्कर्षों को गंभीरता से लेते हुए प्रत्येक गांव में स्कूल स्थापित करने पर काम करने की जरूरत है.