लद्दाख का नांग गांव 12000 फीट की उंचाई पर सब्जियों की खेती कर कमा रहा मुनाफा, जानें कैसे

Ladakh Nang Vegetable Farming
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Ladakh Nang Vegetable Farming : तकनीक के माध्यम से वहां के लोगों को मिली नई राह

Ladakh Nang Vegetable Farming : आम तौर पर हम लद्दाख को देखकर उसकी बर्फ से ढकी खूबसूरत वादियां और वहां की अदभुत दृश्यों की तारीफ करते हैं.

लेकिन शायद हमारे जहन में ये बात नहीं आती कि इतनी उंचाई पर बसे इस शहर के लोंगों का जीवन किताना मुश्किल भरा होता होगा.
बता दें कि लद्दाख समुद्र तल से 10,000 फीट ऊपर बसा हुआ शहर है जो ऊंची पहाड़ियों से घिरा हुआ है. इसी वजह इस जगह पर पेडों की कमी है और ज्यादातर जमीन बंजर है.
जानकारों का मानना है कि हाल के वर्षों में पर्यटन, परिवर्तन और परिवहन की वजह से हुए जलवायु परिवर्तन ने इस क्षेत्र की पारिस्थितियों को और बेकार कर दिया है. जिसकी वजह से ग्लेशियरों की संख्या कम होती जा रही है.
लद्दाख के इलाके में एक छोटा सा गांव है नांग, इस गांव के लोग भी बाकी गांव के लोगों की तरह जीवन जीने के लिए हर पल संघर्ष करने के लिए मजबूर है.
समुद्र तल से 12,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस गांव में ऑक्सीजन की भारी कमी है जिसके चलते मानव और साथ ही घरेलू जानवर दोनों परेशानियों का सामना करते हैं.
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वहीं कृषि की बात करें तो ये लोग सिर्फ साल के उस वक्त खेती करते हैं जब गर्मियों की वजह से ग्लैशियर का पानी उनके पास पहुंचता है.
लेह शहर से 40 किमी दूर स्थित नांग गांव पहाड़ियों के बीच 300 एकड़ में फैला हुआ है जहां 74 परिवार के 400 लोग अपनी पैतृक कृषि परंपरा को मानते हुए जीवनयापन करते हैं.
बढते जलवायु परिवर्तन की वजह से नांग गांव के लोगों में 82 वर्षीय चेवांग नॉरफेल के मानव निर्मित ग्लेशियरों की जरूरत बढ़ गई है.
चेवांग द्वारा तैयार किए गए इस आर्टिफिशियल ग्लेशियर के लिए उन्हें पद्मश्री से भी नवाजा गया है. गांव के लोग अब काफी हद तक इसी अर्टिफिशियल ग्लैशियर पर निर्भर है.
ऐसे ही सोनम वांगचुक और उनके शैक्षणिक संस्थान, एसईसीएमओएल ने भी किसानों के भंडारण को लेकर इसी तरह की पहल की शुरुआत करी है.
बता दें कि नांग के किसान अप्रैल में अपनी फसलों की बोआई करते हैं और ठंड शुरू होने से पहले सितंबर-अक्टूबर तक इसकी कटाई कर लेते हैं.
पहले अपनी फसलों को खराब होने से बचाने के लिए यहां के लोग जमीन के नीचे गड्ढे में अपना भंडारण बनाते थे. लेकिन ऐसा करने पर सब्जियां, विशेष रूप से आलू, वहां रखने के बाद इस्तेमाल करने के लायक नहीं रहते.
इसी समस्या का हल निकाला है डिफेंस इंस्टियूट ऑल हाइ एलटिट्यूड रिसर्च के वैज्ञानिकों ने. इन्होंने तकनीक के माध्यम से सब्जियों को स्टोर करने वाले ऐसे सेलर्श(Cellers) बनाए हैं जो इतनी उंचाई पर भी लोगों को नुकसान से बचा रही है.
साथ ही इसके इस्तेमाल से लोग पनी उगाई गई सब्जियों को बाजार में बेच कर अच्छा मुनाफा भी कमा रहे
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बता कि इन सेलर्स को एक कमरे के आकार के रूप में बनाया जाता हैं, जो जमीन के नीचे छह फीट और दो फिट  ऊपर हैं. ये लकड़ी, मिट्टी और घास से बने होते हैं और खास बात यह है कि ये पूरी तरह से नेचुरल है.
इसके प्रयोग से नांग के ग्रामीण अब चरम तापमान में भी आलू और कृषि उपज के नुकसान को रोकने में सक्षम हैं.साथ ही गाजर, मूली, सलिप, गोभी, और प्याज जैसे रूट फसलों को भी इन पर्यावरण-अनुकूल भूमिगत वॉल्ट्स में भी संग्रहीत किया जाता है.
नांग में वरिष्ठ नागरिक समस्तान ज़ांगपो बताते हैं कि समुदाय के लिए सब्जी सेलर्स सही “हाइबरनेशन हब” हैं. इससे यहां के लोंगों के जीवन में काफी बदलाए आए हैं.

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