खेतों में पराली जलानी से देश को हो रहा 2 लाख करोड़ का नुकसान

Parali Burning Economical Effect
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Parali Burning Economical Effect : इससे होने वाले प्रदूषण से आस पास के इलाकों में धुंध सा छा जाता है

Parali Burning Economical Effect : ‘पराली‘ कुछ समय पहले तक यह शब्द सिर्फ खेती-किसानी करने वाले या फिर इससे जुडे़ लोगों तक ही सीमित था, मगर अब ये उत्तर भारत में रहने वाले लोगों की नींदे उड़ा चुका है.

ऐसा इसलिए क्योंकी पराली (खेतों में जलने वाले कृषि अवशेष) जलाने के कारण उससे होने वाले वायु प्रदूषण से समूचे नार्थ इंडिया में धुंध सा छा रहा है.
जिस वजह से वहां लोगों को बाहर निकलने के दौरान सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है.
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सिर्फ इतना ही नहीं आप सुनकर शायद यकीन ना करें लेकिन पराली जलाने के कारण देश को लगभग 2 लाख करोड़ (30 अरब डॉलर) का नुकसान हो रहा है.
अमेरिका के इंटरनैशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट में हुई स्टडी में दावा किया गया है कि पराली जलाने से होने वाले धुएं और प्रदूषण की वजह से भारत को हर साल 2 लाख करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा है.
शोधकर्ताओं ने दावा किया है की इसकी सबसे ज्यादा चपेट में पंजाब, हरियाणा,यूपी और दिल्ली हैं.
स्टडी में कहा गया है कि जैसे ही हरियाणा और पंजाब में पराली जलना शुरू होती है वहां के आसपास रहने वाले लोगों के अंदर एक्यूट रेसपिरेटरी इन्फेक्शन (ARI) का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है.
अध्ययन के मुताबिक 5 साल से कम उम्र के बच्चों में इस संक्रमण का खतरा सर्वाधिक होता है.
अध्ययन के सह लेखक सैमुअल स्कॉट ने कहा कि वायु की खराब गुणवत्ता दुनियाभर में स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या बन गयी है और दिल्ली में तो हवा में पार्टिकुलेट मैटर का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से 20 गुणा तक अधिक हो गया है.
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स्टडी में दावा किया गया है कि सर्दियों में पराली जलाने की वजह से कुछ दिनों तक दिल्ली में Pm यानी पर्टिक्यूलेट मैटर का स्तर WHO के मानकों से 20 गुना तक ज्यादा बढ़ जाता है.
बता दें की खेतों में पराली जलाने से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को लेकर पहली बार इस तरह का अध्ययन किया गया है.
वहीं पटाखों से हाने वाले नुकसान की बात करें तो इससे निकलने वाले धुएं से करीब 50,000 करोड़ का सालाना नुकसान देश को होता है.