Startups In Indian Farming : स्टार्टअप कंपनियों की नई तकनीक से भारतीय कृषि की सुधर सकती है दशा

demo pic

Startups In Indian Farming : तकनीक बन सकती है भारतीय किसानों का सहारा

Startups In Indian Farming : वक्त के साथ साथ बढ़ती जनसंख्या दुनिया के लिए मुश्किल बनती जा रही है जिसका सीधा असर भुखमरी पर पड़ रहा है.

पूरी दुनिया में आज के समय में फैली भुखमरी का सबसे बड़ा कारण है फसलों के पैदावार में होने वाली कमी. बीते कुछ दशकों से पूरे विश्व भर में जनसंख्या में तो तेजी से वृद्धी हुई है मगर उतनी तेजी से फसलों की पैदावार नहीं की जा सकी है.
आज अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे विकसित देश भी अपने यहां की जनसंख्या के मुकाबले फसलों की कम पैदावार से जूझ रहे हैं.
चिंता की बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र के एक अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक लगभग 1.7 अरब लोग पूरी दुनिया में भूखे रहेंगे.
बात अगर हम सिर्फ भारत की कर तो यहां पर मुश्किलें और भी ज्यादा हैं क्योंकि भारतीय कृषि की हालत हालिया दशक में काफी निराशाजनक रही है.
जिसकी प्रमुख वजह है कि यहां की पूर्व की सरकारें लगातार देश में किसानों के बिगड़ते हालातों की अनदेखी करती रही हैं. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन की वजह से हुए नुकसान ने भी पिछले तीन दशकों में लगभग 60,000 भारतीय किसानों की जान ले ली है.
तकनीक बन सकती है भारतीय किसानों का सहारा
कृषि क्षेत्र को फिर से जिंदा करने के लिए आज के समय में टेकनॉलोजी ही वो तरीका है जिसकी मदद से किसानों की दशा को कुछ हद तक सुधारा जा सकता है.
भारत में ऐसा ही एक एजेटेक नाम का स्टार्टअप अपनी टेकनॉलोजी का इस्तेमाल करके कृषि प्रक्रियाओं को और अधिक बेहतर बनाने और फसलों की उत्पादकता में सुधार लाने की कोशिश कर रहा है.
वहीं एक अन्य स्टार्टअप चलाने वाले ग्रामोफोन के सह-संस्थापक तौसिफ खान का कहना है कि चीन में भारत की तुलना में लगभग 40% कम पानी उपलब्ध है और उसकी कृषि लायक जमीन भी औसत है. लेकिन इसके बावजूद उसकी उत्पादकता भारत की तुलना में लगभग दोगुनी है.
ऐसा ही अपने देश में भी करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि फसल के सही चयन, अच्छी खाद, पेस्टीसाइड्स और फर्टीलाइजर के सही इस्तेमाल से हमारे यहां भी कृषि उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है.
उन्होंने बताया कि उनका स्टार्टअप किसानों को जानकारी देने के लिए जमीन की स्थितियों का अध्यन करता है और फिर उसके हिसाब से ही बाकी चीजों के इस्तमाल करने के बारे में उन्हें जानकारी देता है.
तौसिफ खान ने एक जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनके इस स्टार्टअप से मध्य प्रदेश राज्य में 50,000 से अधिक किसानों को लहसुन की खेती की पैदावार में 40 प्रतिशत तक का फायदा मिला है.
वहीं इसी तरह के एक अन्य स्टार्टअप ने भी नई तकनीक जैसे रिमोट सेंसिंग और क्लाउड कंप्यूटिंग का कृषि में इस्तेमाल करके यह दिखाया है कि कैसे दूसरे सेक्टर में विकसित चीजें कृषि में भी प्रयोग में लाई जा सकती हैं.
इन चुनौतियों का सामना करती हैं स्टार्टअप
भारतीय कृषि में बदलाव लाने के लिए पिछले साल, एजटेक स्टार्टअप स्कीमेट, ईएम 3 और एग्रोस्टार ने फंडिंग राउंड में 10 मिलियन डॉलर जुटाए थे,हो सकता है कि आपको ये रकम भले ही बहुत बड़ी लगी लेकिन उनके आगे चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी हैं.
क्रॉप प्राइसिंग, मशीनरी के लिए क्रेडिट की कम पहुंच, बार-बार सूखा पड़ना, मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आना, आपूर्ति श्रृंखला में बहुत से बिचौलियों का होना और सरकार से समय पर समर्थन की कमी इस तरह के स्टार्टअप की मुख्य चुनौतियां हैं. जबकि कृषि के उत्थान के लिए इन चुनौतियां का समाधान जरूरी है.
इंटरनेट से निकल सकते हैं समाधान
गौरतलब है कि अब ग्रामीण भारत में भी इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि वो साल 2020 तक ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 315 मिलियन भारतीयों को इंटरनेट से जोड़े.
वहीं ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट पहुंच बढ़ना भारत में एग्टेक बाजार के लिए एक नया मोड़ है. इससे यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि साल 2020 तक किसानों की टेकनॉलोजी तक पहुंच और भी आसान हो जाएगी.
नए स्टार्टअपों के लिए चुनौती भी मौका भी
नए स्टार्टअप भारत की कृषि में बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं. लेकिन इन स्टार्टअपों के लिए जितने मौके है उतनी ही बड़ी चुनौतीयां भी.
भारत में कृषि करने वाले लोगों की संख्या बहुत है इस वजह से वक्त के साथ यहां काम करने के ज्यादा मौके हैं. मगर इतने बड़े क्षेत्र में बदलाव करना हर स्टार्टअप के लिए काफी चुनौति भरा रह सकता है.

साभार – फोर्ब्स 
For More Hindi Positive News and Positive News India Follow Us On FacebookTwitter, Instagram, and Google Plus