किसानों को अनाज बेचने के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे मंडी के चक्कर, ब्लैक बॉक्स की हुई खोज

ब्लैक बॉक्स
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ब्लैक बॉक्स :  कोल्ड स्टोरेज में रखे अनाज को खराब होने से बचाने के लिए एक भारतीय कंपनी ने ब्लैक बॉक्स नाम की नई तकनीक विकसित की है. यह तकनीक 1,000 दिनों के लिए किसी भी कृषि वस्तु को खराब होने से बचा सकती है.
 ब्लैक बॉक्स एक अनोखी तकनीक है जिसे भारतीय मूल के साहिल पीरजादा और सचिन अधिकारी ने पेश किया है.
इसके लिए इन्होंने स्पेन स्थित न्यू फ्रूट कंपनी के साथ समझौता किया है.
इसे किसी भी कारखाने या संयंत्र में आसानी से स्थापित किया जा सकता है.
सामान्य कोल्ड स्टोरेज में नाइट्रोजन का उपयोग किया जाता है जबकि ‘ब्लैक बॉक्स’ सिस्टम में न तो नाइट्रोजन और न ही कोई अन्य परिरक्षक(प्रीजर्वर) का इस्तेमाल किया जाता है.
कंपनी के फाउंडर सदस्य साहिल पीरजादा ने बताया कि हम ब्लैक बॉक्स की मदद से फल, सब्जियां यहां तक की मांस भी 1000 दिनों तक ताजा रख सकते हैं.
पीरजादा ने कहा कि इस नए अविष्कार का दुनिया भर में परीक्षण किया जा चुका है. जिसके बाद इसे अमेरिका में पेंटेट कराया गया.
उन्होंने कहा कि हमारी कंपनी कोल्ड स्टोरेज के नए संयंत्रो को भारतीय उपमहाद्वीप में स्थापित करेगी.
पीरजदा ने जानकारी दी कि इसके लिए हमने हैदराबाद में दो संयंत्र खोलने के लिए हिन्दुस्तान एलएनजी के साथ करार किया है. इसके बाद हम आमों के संरक्षण के लिए इसी तरह का संयंत्र उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी खोलेंगे.
इस नई तकनीक के लाभों के बारे में पीरजादा ने दावा किया कि इससे किसानों को मिलने वाला मुनाफा चार गुना बढ़ जाएगा. उन्होंने कहा कि हमारे देश में फसल के दाम गिरने के बाद किसान अपने उत्पाद को सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर रहते हैं. उनके ऐसा करने का एक मुख्य कारण फसलों की उचित संरक्षण और भंडारण की सुविधाओं की कमी है.
पीरजादा ने कहा कि हमारी इस तकनीक की मदद से किसानों को अब बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी वो सीधा हमारे पास आकर अपने फसल के चार गुना मूल्य प्राप्त कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि हमारे ब्लैक बॉक्स तकनीक से युक्त कोल्ड स्टोरेज किसानों से उनके कृषि उत्पाद को खरीदकार स्टोर करेंगे, जिसे बाद में हम अपनी शर्तों के अनुसार निर्यात करेंगे. जो कि किसानों और व्यापारियों के लिए काफी लाभदायक रहेगा.
इसके अलावा, यह देश को और अधिक विदेशी मुद्रा प्राप्त करने में मदद करेगा.
पीरजादा ने कहा कि शुरू में इस भंडारण की क्षमता प्रतिदिन 30 टन रहेगी. जिसे 1000 टन प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है.