उत्तराखंड के किसान ने खोजा दर्द का मर्ज, अब नहीं सड़ेगा देश में अनाज

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फोटो साभार- पीटीआई
हर साल देश में अनाज भंडारण की उचित व्यवस्था ना हो पाने के कारण किसानों की सैकड़ों टन फसलें खराब हो जाती हैं. लेकिन हमारी सरकारें इस विषय पर आज तक किसानों के खराब होती फसलों के दर्द को नहीं समझ पाई.
सालों से सरकार की इस ढ़िलाई को देखते हुए अब मजबूर होकर किसान भाईयों ने अपने दर्द के मर्ज की दवा खुद ही खोज निकाली. देश के कोनों में हर साल सड़ने वाले सैकड़ों टन अनाज को बचाने के लिए उत्तराखंड के एक युवा किसान ने आधुनिक यंत्र की खोज है .
सरकार से उठा भरोसा, तो खुद निकाला तोड़
देश में हर साल सैकड़ों टन अनाज को सड़ता देख उत्तराखंड के ऊधमिसंहनगर जिले के चकरपुर गांव निवासी अरूण कुमार काम्बोज ने हवन पात्र तकनीक से इस यंत्र को बनाया है. इस यंत्र का काम भंडारण कक्ष में आक्सीजन को समाप्त करना रहता है.
अरूण ने बताया कि भंडारण कक्ष में आक्सीजन की मौजूदगी में अनाज सड़ने की संभावना अधिक होती है. यह यंत्र अंगीठी के समान होता है, जिससे कमरे में कार्बन डाई आक्साइड प्रवाहित की जाती है. ताकि आक्सीजन खत्म की जा सके.
उन्होंने बताया कि जब कमरे में आक्सीजन खत्म हो जाती है, तो यह यंत्र स्वतः ही बंद हो जाता है. और इस यंत्र की सबसे खास बात यह है कि इसमें फसलों को बचाने के लिए रसायनिक दवाइयों का प्रयोग भी नहीं किया जाता.
अरूण कुमार का मानना है कि देश में अनाज का सड़ना किसानों की बुरी स्थिति को दर्शाता है. इसी समस्या को खत्म करने के लिए ही उन्होंने इस यंत्र की खोज की है.
अनाज सड़ने से किसानों पर बढ़ता है कर्ज
अरूण बताते हैं कि उनके जिले ऊधमसिंहनगर में अनाज भंडारण की समस्या मुख्य है. किसानों के पास भंडारण सुविधा न होने के कारण वह अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत को खराब होते देखते हैं. इस वजह से कई किसान भाई अनाज सड़ने के कारण लाखों रूपये के कर्ज में डूबे हुए हैं.
वहीं अब गांव वालों का मानना हैं कि अरूण की इस खोज से किसानों को अपने अनाज को सड़ने से बचाने का एक विकल्प मिलेगा.
मात्र 2300 रूपये है यंत्र की लागत
अरूण कुमार को कृषि विभाग व अन्य विभाग इस कारगर अविष्कार के लिए सम्मानित भी कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि इस यंत्र की कुल लागत 2300 रूपये है. जबकि इस एक यंत्र से 100 कुंतल अनाज को सुरक्षित रखा जा सकता है.
भंडारण (स्टोरेज) की व्यवस्था न होने से सड़ रहा अनाज
भारत में अनाज स्टोरेज की खास व्यवस्था नहीं है. इससे देश में हर साल करीब 67 लाख टन अनाज सड़कर खराब हो जाता है. कृषि मंत्रालय की फसल अनुसंधान इकाई सिफेट की रिपोर्ट के अनुसार करीब 10 लाख टन प्याज खेतों से बाजार तक लाने में सड़ जाता है. वहीं 22 लाख टन टमाटर रास्ते में खराब हो जाते हैं.
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कृषि प्रधान देश में किसानों का खेती से मोहभंग क्यों होना लगा है.