इस नए स्टार्टअप से आपके आंगन में भी हो सकेगी बिना मिट्टी की खेती

Vertical Organic Farming
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Vertical Organic Farming : यूथ बिजनेस स्टार्ट-अप ने बनाया वर्टिकल मिनी फार्म का एक मॉडल

Vertical Organic Farming : अगर आप बाजार में मिलने वाली केमिकल्स युक्त सब्जियों के सेवन से बचने के लिए घर में ही साग-सब्जी उगाने की इच्छा रखते हैं तो आपके लिए कुछ नौजवान दोस्तों ने एक नई तकनीक विकसीत की है.

दरअसल मुंबई का ये स्टार्ट-अप फर्म U-फार्म टेक्नोलॉजीज आपको हाइड्रोपोनिक बागवानी करने की तकनीक मुहैया कराऐगा जो कम जगह में आपको खेती के बेहतरीन नतीजे देगा.
इस फर्म ने अपार्टमेंट, परिसर या सुपरमार्केट के अंदर मॉड्यूलर खेती करने का एक ऐसा बेजोड़ तरीका निकाला है जिसके माध्यम से आप कम जगह में भी बिना किसी लाग लपेट के आर्गेनिक खेती कर सकते हैं .
चैन्नई के बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और साइंस (बीआईटीएस) पिलानी के तीन और हॉटीकल्चर के एक ग्रेजुएट छात्रों के समूह ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संयोजन से ऑटोमेटिक कृषि उपकरण बनाने का विचार पेश किया था.
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संस्थापकों में से एक उत्सव गुढ़का ने इस स्टार्टअप के बारे बताते हुए कहा कि हमारा यह विचार किसी भी व्यक्ति के घर पर नए ऑर्गेनिक खाद्य को विकसित करने का था, जिसमें काफी हद तक हम कामयाब भी रहे हैं.
खासकर हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में जहां 100 किमी की दूरी पर हमने बड़े पैमाने वाले हाइड्रोपोनिक खेती की नीव रख दी है.
गुढ़का ने कहा कि यह उन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए बनाया गया है जहां पोषण मूल्य ग्राहक तक पहुंचने से पहले ही आधे से नीचे आ जाता है साथ ही जहां आए दिन मिलावट की शिकायतें भी रहती हैं.
गुढ़का ने बताया कि वर्तमान में इस ग्रुप का व्यवसाय मॉडल कम से कम 40 परिवारों वाले एक अपार्टमेंट परिसर में काम करता है. इस स्टार्टअप में सुपरमार्केट्स के साथ राजस्व हिस्सेदारी फॉरमूले पर काम किया जा रहा है.
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क्या है हाइड्रोपोनिक तकनीक
हाइड्रोपोनिक तकनीक से हर्ब्स बिना मिट्टी के ही पैदा किये जाते हैं, वहीं जरूरी पोषक तत्व पानी के माध्यम से सीधे जड़ों में पहुंचा दिए जाते है.
इसमें पौधे मल्टी लेयर फ्रेम की सहायता से पाइप के ऊपर उगाये जाते है जिनकी जड़ें पाइप के अंदर लटकती रहती है जहाँ से पानी में से पौधे जरूरी पोषक तत्व सोखते रहते हैं.
हाइड्रोपोनिक खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 90 प्रतिशत पानी की बचत होती है क्योंकि यह बिना मिट्टी की खेती है. साथ ही खेती के लिए आपको बड़े खेत की कोई जरूरत नहीं पड़ती यह आप किसी भी खाली पड़ी जगह से शुरू कर सकते है.
वहीं टीम ने कहा कि इसके लिए लागत उतनी ही आएगी जितनी जैव पदार्थों के लिए नेचर बास्केट में तलब किया जाएगा. उदाहरण के लिए, पालक (250 ग्राम) की कीमत 65 रुपए के आसपास होगी.

साभार – इंडियन एक्सप्रेस