वर्तमान में देश की ग्राम पंचायतो में 13 लाख से ज्यादा महिलाएं कर रही प्रतिनिधित्व – सरकार

Women Representatives In Panchayat
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Women Representatives In Panchayat : आकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा महिला प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश प्रदेश में है

Women Representatives In Panchayat : थोड़ा ही सही मगर देश की राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है,सबसे बड़ी खुशी की बात है कि इसमें ग्राम सभाओं भी शामिल है.

जी हां आज जब विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं तो ये कहना गलता नहीं होगा कि राजनीति में भी अब इनकी सक्रिय भूमिका बन रही है.
इस बात को हम यूं ही हवा में नही कह रहे बल्कि हाल में सरकार द्वारा जारी एक रिपोर्ट में माना गया है.
दरअसल भारत सरकार ने गुरुवार को संसद में बताया की मौजूदा समय में देश की पंचायतों राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या 13 लाख से ज्यादा है.
एक लिखित सवाल के जवाब में भाजपा सांसद रामचरण बोहरा ने सदन को सूचित किया की वर्तमान में देश की पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की कुल संख्या 13 लाख 67 हजार 594 है.
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उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा महिला प्रतिनिधि
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पंचायती राज संस्थाओं के आकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा महिला प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश प्रदेश में है,यहां ये संख्या 2 लाख 72 हजार 733 है.
इसके बाद दूसरे पर मध्य प्रदेश का नंबर आता है जहां 1 लाख 96 हजार 490 महिलाएं अपनी अपनी ग्राम सभा का नेतृत्व कर रही हैं.
तीसरे पर महाराष्ट्र 1 लाख 21 हजार 490 और चौथे पर  57 हजार 887 महिला प्रतिनिधियों के साथ बिहार का नंबर आता है.
छत्तीसगढ़ में इनकी संख्या 93 हजार 287 और राजस्थान में 70 हजार 527 है.
जम्मू-कश्मीर की पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या 11 हजार 169 है जबकि कर्नाटक में 50,892 और केरल में 9 हजार 630 है.
पश्चिम बंगाल में महिला पंचायत प्रतिनिधियों की संख्या 29 हजार 518, मणिपुर में 868, सिक्किम में 548, त्रिपुरा में 3,006 और असम में 13,410 है.
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महिला प्रतिनिधित्व से सुलझि कई समस्या
मंत्री ने 2008 में प्रकाशित हुए निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के बारे में कराए गए देशव्यापी अध्ययन का हवाला देते हुए इसकी तारीफ करी.
बता दें कि इस अध्ययन में आत्म-सम्मान, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाने को लेकर महिला प्रतिनिधियों के सशक्तिकरण पर आकलन किया गया था.
मंत्री जी ने संसद में बताया की इस अध्ययन से पता चलता है कि ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और महिलाओं से संबंधित मुद्दों, जैसे – पेयजल, स्वच्छता और बाल-लिंगानुपात पर ध्यान दिया जा रहा है.
इसके अलावा निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों ने स्कूलों में लड़कियों के नामांकन को प्रोत्साहित करने और घरेलू हिंसा को कम करने का सफल प्रयास किए हैं जिसका नतीजा आज हम सबको दिख रहा है.