Zero Tillage Farming : अब बेमौसम बारिश भी किसान की मेहनत पर नहीं फेर पाएगी पानी

Modi Cabinet Hikes Kharif Crops MSP
demo pic

Zero Tillage Farming : बेहद सरल और बड़ी मुनाफेदार है तकनीक

Zero Tillage Farming : खेती में सबसे बड़ी बाधा बनने वाली बेमौसम बारिश से अब किसान भाइयों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब बारिश का पानी आपकी मेहनत में पानी नहीं फेर पाएगा.

आपको जानकर खुशी होगी कि कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक इजात की है, जो बेमौसमी बारिश से खऱाब होने वाली फसलों की रक्षा करेगी.
बेहद कारगर है जीरो टिलेज तकनीक
कृषि वैज्ञानिकों ने बेमौसम होने वाली बारिश के पानी से खराब होती फसलों से निपटने के लिए जीरो टिलेज तकनीक विकसित की है.
कृषि की भाषा में जीरो टिलेज का पर्याय फसल को बिना तैयार की हुई जमीन में लगाना है.
लेकिन आधुनिक समय में जीरो टिलेज का मतलब पूर्व फसल के अवशेष युक्त भूमि को बिना जोते उसपर नई फसल की बोआई करने को जीरो टीलेज तकनीक कहते हैं.
इस तकनीकी को सबसे ज़्यादा हरियाणा (46 प्रतिशत), पंजाब (26 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (21 प्रतिशत) में अपनाया गया है.
छोटे किसानों को मिलेगी बड़ी राहत
इस तकनीक का सबसे ज्यादा लाभ छोटे किसानों को होगा क्योंकि बेमौसमी बारिश से उन्हें सबसे ज्यादा जूझना पड़ता है.
यह तकनीक बारिश के पानी से आपकी फसल की रक्षा करती है और फसल को बाहरी रूप से सुरक्षा भी प्रदान करती है.
इस तकनीक के इस्तेमाल से पानी फसल के भीतर नहीं पहुंच पाता है, और आपकी फसल सुरक्षित बनी रहती है.
लाख फायदे के बाद भी यह पद्धति बेहद सरल और बड़ी मुनाफेदार है.
हरियाणा के 200 किसानों पर किए गए इस शोध में पाया है कि इस तकनीक से गेहूं की बुआई करने पर उत्पादन में करीब 16 फीसद की बढ़ोत्तरी देखी गई है.
जीरो टिलेज तकनीक में धान की कटाई के बाद खेत से खरपतवार हटाने और जुताई करने की जरूरत नहीं पड़ती. सीधे ही उसमें गेंहु की नई फसल के बीज बो दिए जाते हैं.
सिर्फ धान और गेंहु ही नहीं बल्कि इस तकनीक का उपयोग आप हर फसल की बोआई में कर सकते हैं.
बेमौसमी बारिश से नहीं होगा नुकसान
जिस तरह विश्व में जलवायु परिवर्तन हो रहा है, उसका असर भारत पर भी देखने को मिल रहा है. बेमौसम होने वाली बारिश इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.
पिछले साल बेमौसम की बारिश से ही देश में रबी की फसल को खासा नुकसान पहुंचा था.
हरियाणा सरकार को भायी तकनीक
वैसे तो इस तकनीक का इस्तेमाल हरियाणा में काफी किसानों द्वारा किया जा रहा है लेकिन अब सरकार ने इसके अनेक फायदे को देखते हुए इसे राज्य के हर आम किसान तक पहुंचाने के लिए कहा है.

शोध को अंतरराष्ट्रीय संस्था ने सराहा

शोधकर्ता जितेंद्र प्रकाश आर्यल के इस शोध की अंतरराष्ट्रीय संस्था सीमिट ने बहुत सराहना की है. संस्था ने कहा कि यह तकनीक किसानों को बहुत फायदा देगी.
बता दें कि यह संस्था किसान सशक्तिकरण से संबंधित वार्षिक पत्रिका प्रकाशित करती हैं. इसमें किसान हितों व समस्याओं को स्थान दिया जाता है.
इस साल की पत्रिका में संस्था ने जितेंद्र के इस शोध को भी शामिल किया है.

For More Hindi Positive News and Positive News India Follow Us On FacebookTwitter, Instagram, and Google Plus