ईरान प्रतिबंधों पर अमेरिका ने भारत को दी कौन कौन सी छूट, जानें

America Relief India On Iran Banned

America Relief India On Iran Banned : अमेरिका ने भारत को ईरान से तेल खरीदने और चाबहार पोर्ट के विकास में छूट दे दी है.

America Relief India On Iran Banned : ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे, 8 मई को ईरान न्यूक्लियर डील से अलग होने की घोषणा करने के बाद मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ये फैसला दुनिया भर में उथल पुतल का कारण बना हुआ है.

दरअसल ईरान दक्षिण और पश्चिमी एशिआई देशों में तेल की आपूर्ति करने के मामले में प्रमुख देश है ऐसे में प्रतिबंधों के बाद  इससे तेल आयात करने वाले देशों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
लेकिन बीते 2 दिन पहलेअमेरिका ने भारत समेत 8 देशों को ईरान से तेल खरीदने की छूट दे दी है.
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने घोषणा करी कि ईरान से तेल खरीदने की पाबंदी से भारत, चीन, इटली, ग्रीस, तुर्की, ताइवान, दक्षिण कोरिया और जापान सहित आठ देशों को फिलहाल अस्थायी रूप से राहत दी गई है.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका आगे हर संभव प्रयास करता रहेगा, तेल से छूट का ये मतलब बिल्कुल भी ना निकाला जाए कि उसने ईरान की गलतियों को माफ कर दिया है.
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पोम्पियो ने कहा कि प्रतिबंधों के बाद इन देशों ने ईरान तेल खरीदने में काफी कटौती की थी जबकि तेल आयात नहीं रोकने वाले यूरोप और अन्य देशों पर जुर्माना भी लगाया गया है.

America Relief India On Iran Banned

चाबहार पोर्ट पर भी भारत के आगे झुका अमेरिका

तेल आयात में छूट के बाद अमेरिका ने ईरान और भारत के बीच व्यापार के दृष्टि से अहम रणनीतिक समझौते चाबहार पोर्ट के विकास के लिए अपने प्रतिबंधों में ढिलाई बरती है.
बता दें कि भारत और अफगानिस्तान ने मई 2016 में तीनों देशों में ट्रांजिट एवं ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर स्थापित करने को लेकर एक समझौता किया था.
इसके तहत चाबहार पोर्ट को ईरान में समुद्री परिवहन के एक रीजनल हब के तौर पर विकसित किया जाना है. गौरतलब है कि चाबहार ईरान में सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत का समुद्र किनारे बसा एक शहर है.
भारत के लिए ये काफी अहम है क्योंकि इसके माध्यम से हमारा समुद्री सड़क मार्ग से अफगानिस्तान पहुँचने का मार्ग काफी सरल और सीधा हो जायेगा और फिर इस स्थान तक पहुँचने के लिए हमें पाकिस्तान के रास्ते की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी

भारत के लिए कितना अहम है ईरान

चीन की पाकिस्तान पर पकड़ बनाने के बाद भारत भी अफगानिस्तान समेत ईरान जैसे देशों से अपने संबंध सुधारने में लग गया है.
2017-18 में भारत ने ईरान से 2.2 करोड़ टन तेल आयात किया था और अगले साल तीन करोड़ टन ख़रीदने की योजना है.
वहीं ईरान भी एशिया में बढ़ते भारत के दबदबे को नजरअंदाज नहीं कर सकता और इसकी बड़ी वजह है यहां पर ऊर्जा की बढ़ती मांग.
लेकिन अगर इतिहास पर नजर डालें तो ईरान और भारत की दोस्ती हिचकिचाने वाली रही है और इसका बड़ा कारण है इराक और अमेरिका.
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दरअसल अमेरिका और भारत में नजदीकि बढ़ने के बाद वो कभी नही चाहता कि दोनों देशों के बीच नजदीकि बढ़े. वहीं ईरान को लगता था कि भारत इराक़ और अरब देशों के ज़्यादा क़रीब है ऐसे में वो भी हमें खुले तौर पर स्वीकार नहीं कर पा रहा था.

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2016 के बाद हालात सुधरे

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों में मित्रता की एक नई लहर पनपी है. साल 2016 में पीएम मोदी विदेश यात्रा पर पहली बार ईरान पहुंचे थे और उन्होंने ईरान को चाबहार बंदरगाह के लिए राजी कर लिया.
इसके बाद 2017 में भारत और ईरान के बीच कई बड़े ऊर्जा समझौते हुए थे. ईरान के साथ भारत ने फ़रज़ाद बी समझौते को भी अंजाम तक पहुंचाया था.
वहीं इसके बाद इसी साल फरवरी में राष्ट्रपति डॉ. हसन रूहानी प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर भारत पहुंचे थे यहां उन्होंने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करते हुए कई दोनों देशों के बीच होने वाले कई अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए.

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