सऊदी अरब में कुछ ऐसी है महिलाओं की ज़िन्दगी, नियम-कानून जानकर होश उड़ जायेंगे

Condition Of Women In Saudi Arabia
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Condition Of Women In Saudi Arabia : सउदी अरब की 18 साल की लड़की ने इस्लाम छोड़ दूसरे देश में मांगी शरण

Condition Of Women In Saudi Arabia : महिलाओं पर लगने वाले नियम-कानून की बातें आती हैं तो हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम खाड़ी देशों का ही आता है, जिसमें सउदी अरब प्रमुख है.

हम सबने सुना है कि किस तरह से सऊदी में रह रही महिलाओं को ज़िन्दगी के हर छोटे-बड़े काम को करने के लिए हजारों तरह के नियमों का पालन करना पड़ता है.
ऐसे में हाल ही में सऊदी अरब एक बार फिर उस वक़्त चर्चा में आ गया जब वहां एक महिला ने इस्लाम छोड़ने के बाद ऑस्ट्रेलिया में बसने के लिए नागरिकता की मांग की.
जब वो अपने देश छोड़कर आस्ट्रेलिया रवाना हुई तो रास्ते में उसके परिवार की शिकायत पर बैंकॉक एयरपोर्ट पर उसे पकड़ लिया गया था.
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थाईलैंड प्रशासन ने उसका पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए थे जिसके बाद उसे जबरन घर वापस भेजने के लिए एक होटल में रखा गया था.
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रहाफ
उस महिला को यह डर था की वापस सउदी पहुंचने के बाद परिवार वाले उसकी हत्या कर देंगे. 18 साल की युवती जिसका नाम रहाफ है उसने अपनी इस कहानी को सशल मीडिया पर बताया जिसके बाद देखते ही देखते पुरी दुनिया ने इसकी तरफ मदद का हाथ बढ़ाया.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चले अभियान के बाद संयुक्त राष्ट्र ने युवती को अपने यहां शरण देने का फैसला लिया है.
वहीं मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया ने भी इस संबंध में बयान जारी कर कहा है कि वह युवती को अपने यहां शरण देने पर विचार कर रहा है
ऐसे में आइये हम आपको बताते हैं महिलाओं पर लगने वाले सऊदी के उन 5 नियमों के बारे में जिसे सुनकर शायद किसी भी स्वतंत्र देश के नागरिक के होश उड़ जायेंगे:
पढ़ाई :
सऊदी में आज भी गार्डियनशिप सिस्टम के तहत महिलाओं को कानूनी या कोई भी निजी काम करने के लिए अपने पुरुष रिश्तेदारों (बाप, भाई, पति, या बेटा) की मदद लेनी पड़ती है.
साल 2017 में सऊदी अरब के शिक्षा मंत्रालय ने ये घोषणा की कि अब स्कूल में लड़कियों को फिजिकल एजुकेशन दी जायेगी.
हालाँकि इस बयान में ये बात साफ़ नहीं थी कि क्या इसके लिए भी लड़कियों को अपने घर के पुरुषों से आज्ञा लेनी होगी या नहीं.
सऊदी में ऐसी ढेरों यूनिवर्सिटी हैं जो सिर्फ और सिर्फ महिलाओं के लिए बनी हैं.
रोज़गार :
सऊदी अरब को दुनिया के सबसे कट्टरपंथ देशों में से गिना जाता है, लेकिन यहाँ सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि सऊदी ने महिलाओं के खिलाफ अपने सख्त नियमों में आश्चर्यजनक बदलाव लाना शरु कर दिया है.
पिछले कुछ समय में इस देश ने ऐसे सकारात्मक बदलाव लाये हैं जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाये.
गार्डियनशिप सिस्टम के तहत अब तक सऊदी महिलाओं पर व्यापार करने की जो भी बंदिशें थीं उन्हें हटा दिया गया है.
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने साल 2017 में अपना उत्तराधिकारी चुन कर “विज़न 2030” को बढ़ावा दिया है.
विज़न 2030 के तहत ऐसा माना जा रहा है कि साल 2030 तक सऊदी में काम करने वाली महिलाओं का कोटा 22 से बढ़कर 30 तक पहुँचाया जा सकता है.
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अब सऊदी अरब में प्राइवेट सेक्टर को बढावा देने के लिए महिलाओं को बिना किसी रोक-टोक के व्यापार करने की स्वतंत्रता दे दी गई है.
यही नहीं अब महिलाएं बिना किसी अनुमति और बिना परिवारजन और पति की मंजूरी के अपना खुद का व्यापार शुरु कर सकती हैं.
सिर्फ इतना ही नहीं अब सऊदी में महिलाएं पुलिस फ़ोर्स भी ज्वाइन कर सकती है.
ड्राइविंग :
नियम कानून तो कई हैं लेकिन बीते कुछ समय में सऊदी ने महिलाओं के खिलाफ रहे कुछ सख्त नियमों में बदलाव करके दुनिया को चकित कर दिया है. इन्ही में से एक नियम है ड्राइविंग से जुड़ा हुआ.
सऊदी में आज भी महिलाओं को अगर अपना पासपोर्ट रीन्यू करवाना है तो उन्हें घर के किसी पुरुष सदस्य की ज़रूरत होती है.
ऐसे में सऊदी में एक बड़ा बदलाव आया साल 2018 मई में जब यहाँ महिलाओं के ड्राइविंग पर लगी पाबंदी हटा दी गयी.
हालाँकि ये बैन हटाने से पहले सऊदी अधिकारियों ने महिलाधिकारों के समर्थन में चल रहे अभियानों को ख़त्म करने के लिए एक मुहिम छेड़ी थी. बताया जाता है कि इस दौरान कई कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार भी किया गया था.
सिर्फ कार्यकर्ताओं को ही नहीं बल्कि उन पुरुषों को भी गिरफ़्तार किया गया था जो इन अभियानों का समर्थन कर रहे थे या फिर महिलाओं के पक्ष में गवाही देने आए थे.
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महिलाओं की निजी स्थिति
सऊदी में महिलाओं के खिलाफ कई सख्त नियम बनाये गए हैं, जिनमें से एक ये है कि सऊदी की महिलाएं अपने परिवार के पुरूष अभिभावक की अनुमति के बिना ना शादी कर सकती है ना ही तलाक ले या दे सकती है.
इसके अलावा वो अपने करीबी पुरूष रिश्तेदारों से घर के बाहर ज्यादा घुलमिल भी नहीं सकती हैं.
ऐसे में अगर उन्हें नियम के विरुद्ध जाकर ऐसा करते हुए पकड़ा जाता है तो उन्हें जेल की सजा हो जाती है.
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सामाजिक जगहों पर भागीदारी
सऊदी महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर अबाया (एक प्रकार का वस्त्र जो सिर से लेकर पांव तक ढंका होता है) पहनना आवश्यक है.
हालांकि अब बदलते समय के साथ रियाद में कुछ जगहों पर महिलाओं ने अपने चेहरे खुले रखने शुरू कर दिए हैं.
वहीं जनवरी 2018 में महिलाओं को पहली बार किसी स्टेडियम में खेल देखने के लिए अनुमति दी गई थी. 

साभार – हिन्दुस्तान टाइम्स

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