भारत को बड़ा आर्थिक झटका देने की तैयारी में अमेरिका, जानिए क्या और क्यों

India America GSP Program

India America GSP Program : भारत के खिलाफ काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है 

India America GSP Program : इन दिनों हमारे प्रधानमंत्री मोदी अपनी रैलियों में सरकार की दो बड़ी कामयाबियों को जोर शोर से उठा रहे हैं, पहला पुलवामा का बदला और दूसरा अपनी सरकार की विदेशी कूटनीती

लेकिन लगता है पीएम की विदेश नीति वाली कूटनीति को किसी की नजर लग गई, अब आप सोच रहें होंगे ऐसा क्या हुआ तो चलिए बताते हैं..
दरअसल अमेरिका में बैठे पीएम मोदी के मित्र और वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एक बड़ा आर्थिक झटका देने का मन बना लिया है.
जी हां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं की वो जल्द ही भारत को व्यापार में जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (GSP) से बाहर करने का फैसला लेने जा रहे हैं.
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इसके लिए बकायदा उन्होंने अमेरिका की संसद यानी ‘कांग्रेस‘ को पत्र लिखकर सूचित भी कर दिया है.
आपको बता दें की अगर सच में ऐसा होता है तो फिर अमेरिकी बाजार में 5.6 बिलियन डॉलर मूल्य के भारतीय उत्पादों के लिए ड्यूटी फ्री यानी कर-मुक्त एंट्री का दरवाजा बंद हो जाएगा.
इसे लेकर ट्रंप का मानना है की अमेरिका के साथ गहन जुड़ाव के बाद भी भारत ने अब तक आश्वासन नहीं दिया है कि वह अपने बाजार में अमेरिका के समानों को समान और उचित पहुंच प्रदान करेगा.
क्या होता है GSP ?
बता दें की जीएसपी अमेरिका का एक ट्रेड प्रोग्राम है , इसके तहत वो विकासशील देशों से बिना टैक्स सामान आयात करता है.
ऐसा इसलिए किया जाता है ताकी विकासशील देश अधिक तेजी से अपनी आर्थिक तरक्की कर सकें.
फिलहाल अमेरिका द्वारा दिए जा रहे इस लाभ को भारत समेत 129 देश प्राप्त कर रहे हैं.
हालांकी 1970 से बनाई गई इस योजना के तहत लाभ पाने वाले देशों में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है.
ट्रंप ने दिखाए कड़े तेवर
मेरीलैंड में कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कान्फ्रेंस (सीपीएसी) में अमेरिकी राष्ट्रपति ने सवाल किया कि क्या भारत हमें बेवकूफ समझता है?
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उन्होंने कहा की ये कैसे हो सकता है की हम एक देश को अपने सामान पर 100 % टैरिफ दें और उनके इसी तरह के सामान पर हमें कुछ न मिले, यह सिलसिला अब आगे नहीं चलेगा.
बता दें की अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, 2017 में भारत के साथ अमेरिकी वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार घाटा 27.3 बिलियन डॉलर था.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये बी दावा किया गया है ट्रंप ने भारत के साथ-साथ तुर्की से भी ये सुविधा छीनने का फैसला किया है.