आयरलैंड में गर्भपात कानून को लेकर चल रहे अभियान का मुख्य चेहरा बनी भारतीय मूल की सविता

Ireland Abortion Campaign

Ireland Abortion Campaign : 25 मई को देश में गर्भपात कानून को लेकर होगा जनमत संग्रह

Ireland Abortion Campaign : आयरलैंड में इस वक्त एक ऐसी चीज का रेफरेंडम होने वाला है जो वहां के सालों पुराने और सख्त कानून में बदलाव की कहानी लिख सकता है.

खास बात यह है कि इस कैंपेन का चेहरा एक भारतीय महिला सविता हलप्पन्नावर को बनाया गया है जिन्हें इस कानून के चलते अपनी जान गंवानी पड़ी थी.
दरअसल आय़रलैंड में गर्भपात को लेकर बनाए गए एक सख्त नियम के चलते भारतीय मूल की सविता को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था.
इसके बाद से देश के अंदर तमाम महिलाएं ने इस कानून में संशोधन को लेकर कैंपेन चलाया क्योंकि वो चाहती हैं कि आगे किसी और को भी यह सब भुगतना ना पड़े.
बता दें कि आयरलैंड की सरकार पर लोगों का दबाव इस कद्र है की उन्होंने 25 मई को इस कानून में संशोधन के लिए  वोटिंग कराने का फैसला किया है.
आपको बता दें कि पिछले 35 साल में पहली बार आयरलैंड में इस नियम के खिलाफ इस तरह से आवाज उठाई जा रही है.
पहली बार कराए गए आयरिश टाइम्स के पोल के हिसाब से 44 प्रतिशत लोग इस संशोधन के पक्ष में थे वहीं 32 प्रतिशत लोग इसके खिलाफ जबकि 17 प्रतिशत लोग किसी भी तरफ नहीं थे.
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क्या कहता है आयरलैंड का कानून
साल 1983 के संशोधन में एक मां को और गर्भ में पल रहे बच्चे को जीने का बराबर का अधिकार दिया गया है. रोमन कैथोलिक बाहुल वाले इस देश में गर्भपात के संबंध में पूरे यूरोप के मुकाबले सबसे कड़े प्रतिबंध हैं. यहां गर्भपात की अनुमति दुर्लभ मामलों में तब दी जाती है जब महिला का जीवन खतरे में हो.
लेकिन पिछले शनिवार को संशोधन के पक्ष में की गई रैली में कई लोगों के शामिल होने से पता चलता है कि ज्यादातर लोग इसके खिलाफ हैं.
वहीं अगर फैसला संशोधन के पक्ष में आता है तो इससे सांसदों के गर्भावस्था के पहले 12 हफ्तों के भीतर गर्भपात की अनुमति देने वाले प्रस्तावित कानून पर बहस करने का तरीका साफ हो जाएगा.
क्या हुआ था सविता के साथ
31 वर्षीय सविता पिछले साल अक्तूबर में अस्पताल में भर्ती हुई थीं, जहां उनका गर्भ गिर गया था और इसके एक हफ्ते बाद सेप्टिसेमिया के कारण उनकी मौत हो गई थी.
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इसके बाद उनके पति ने अस्पताल पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनकी पत्नी द्वारा गर्भपात कराने की मांग पर कोई सुनवाई नहीं करी.
बाद में जब इस मामले में जांच हुई तो सामने आया कि उन्हें गर्भपात की इजाज़त इसलिए नहीं दी गई क्योंकि उनकी जान को ख़तरा नहीं था.
लेकिन जब तक डॉक्टरों को ये बात समझ में आई कि उनकी जान को वाकई ख़तरा है, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
सविता के पति का कहना है कि अगर गर्भपात समय रहते करवा लिया गया होता, तो उनकी पत्नी की जान नहीं जाती.