इराक़ संसदीय चुनाव जीतने के बाद भी मुक्तदा अल-सद्र के लिए आसान नहीं है सत्ता सुख

Muqtada Wins Iraq Election
PC- ALzazeera

Muqtada Wins Iraq Election : ISIS के कब्जे वाले इलाकों को फिर से बसाने के लिए नई सरकार के पास हैं कई चुनौतियां

Muqtada Wins Iraq Election : आईएसआईएस के कब्जे से आजाद होकर आतंकवाद का गढ़ कहा जाने वाला देश इराक एक बार उभरने की कोशिश कर रहा है.

इसी क्रम में देश की आगे की रणनीति तय करने के लिए आम चुनाव कराए गए, जिसमें वहां के शिया नेता मुक्तदा अल-सद्र की जीत हुई है.
बता दें कि काफी जद्दोजहद के बाद इराक में हुए चुनावों में शिया समुदाए के मुक्तदा अल-सद्र के गठबंधन को 54 सीटें मिली हैं, वहीं वर्तमान में इराक के पीएम हैदर अल-अबादी ने 42 सीटों पर जीत दर्ज की है.
हालांकि सद्र खुद प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं, क्योंकि वो प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में खड़े नहीं हुए थे. लेकिन इराक़ में नई सरकार के गठन में उनकी अहम भूमिका होगी.
गौरतलब है कि इराक में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी होनी है, अगर ऐसा नहीं होता है तो निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद हैदर अल-अबादी फिर से प्रधानमंत्री बन सकते हैं.
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कौन हैं ये मुक्तदा अल-सद्र
शिया मौलवी मुक्तदा अल-सद्र 2003 में अमेरिका द्वारा इराक पर किए गए हमले के दौरान एक निजी सेना के प्रमुख थे.
इसके बाद सद्र ने खुद को अमेरिका की सैन्य कार्यवाही के खिलाफ और भ्रष्टाचार विरोधी नेता के तौर पर स्थापित किया. वहीं वो इराक में ईरान की बढ़ती पैठ के भी मुखर आलोचक रहे हैं.
अभी मुक्तदा अल-सद्र के गठबंधन में उनकी ख़ुद की पार्टी इस्तिक़ामा समेत 6 अन्य धर्मनिरपेक्ष समूह शामिल हैं जिसमें से इराक़ी कम्युनिस्ट पार्टी भी है.
सद्दाम हुसाने की मौत के बाद इराक में बढ़ी अशांति

आपको बता दें कि 15 साल पहले इराक़ में अमरीका ने सद्दाम हुसैन को फांसी की सजा सुनाने के साथ उसकी पूरी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंका थीं. जिसके बाद से ही इराक़ अशांति से लगातार जूझ रहा है.

इस देश में आतंरिक अशांति के कारण अब तक कई आतंकी संगठन पनप चुके हैं जिसमें से एक ISIS भी है.
साल 2014 से इराक के ज्यादातर शहरों में खूंखार आंतकी संगठन आईएसआईएस का कब्जा था जिसे अमेरिका की मदद से बीते दिसंबर महीने में पूरी तरह से खड़ेड़ा गया है.
बता दें कि आज भी इराक में पांच हज़ार अमरीकी सैनिक हैं जो स्थानीय सुरक्षा बलों को इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई करने में मदद कर रहे हैं.
यही नहीं इराक में दूसरे देशों के बीच अपनी पैठ जमाने के लिए भी आए दिन संघर्ष होता रहता है जिसके कारण  वह हमेशा एक जंग का मौदान बना हुआ रहता है.
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नई सरकार के पास हैं कई चुनौती
दरअसल, 2014 से इराक का एक बड़ा हिस्सा इस्लामिक स्टेट के कब्जे में था जिसके चलते देश के ज्यादतर हिस्से पूरी तरह तबाह हो चुके हैं.
इन शहरों को फिर से बसाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद मांगने के बाद इराक को 30 अरब डॉलर मिलने वाले हैं लेकिन इराक की आंतरिक हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इसे ठीक करने में 100 अरब डॉलर लगने की उम्मीद है.
इराक़ का कहना है कि केवल मूसल शहर में ही 20 हज़ार घर और व्यापारिक प्रतिष्ठान बर्बाद हुए हैं और 20 लाख से ज़्यादा इराक़ी देश के अलग-अलग हिस्सों में अब भी विस्थापित जीवन जी रहे हैं जिसे दोबारा बसाने की जिम्मेदारी हमें निभाना है.
बहरहाल, इराक़ में जो भी नई सरकार आएगी उसकी बड़ी ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट से लड़ाई में हुई बेइंतहा बर्बादी के बाद मुल्क़ को पटरी पर लाना एक बड़ी चुनौती की तरह होगा.