भारत, अमेरिका के बाद अब सऊदी अरब भी राष्ट्रवाद की ओर

Indian Talent Migration
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सऊदी अरब में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीयों के लिए एक बुरी खबर है. सऊदी अरब की सरकार ने निताकत कानून (सऊदीकरण) में लगातार दूसरी बार संशोधन किया है, जिसके तहत अब सऊदी अरब में नौकरी करने वालों के लिए वीजा प्रक्रिया को और जटिल कर दिया गया है.
सउदी अरब का इस कानून में संशोधन करने का मुख्य उद्देश्य अपने देश के नागरिकों को ज्यादा से ज्यादा नौकरी देना है.
एक अखबार कि रिपोर्ट के मुताबिक, सउदी सरकार ने 2016 में भारतीयों को केवल 1.65 लाख वीजा दिए थे, जबकि यह आंकड़ा 2015 के आंकड़ों से 46 फीसदी कम है.
सऊदी अरब में लगातार बाहरी देशों के नागरिकों को नौकरी पर रखने से देश के नागरिकों के लिए नौकरी का संकट उत्पन्न होने लगा है. इस संकट को वहां की सरकार ने समझते हुए अपने देश के नागरिकों को नौकरी में प्राथमिकता देने का फैसला लिया है.
वर्तमान में सऊदी अरब में भारत के करीब 30 लाख नागरिक कार्यरत हैं. जो किसी और देश के मुकाबले कई ज्यादा है मगर वहां हुए दूसरे संशोधन में कानून को और अधिक जटिल किया गया है, जिसकी वजह से अगले वर्ष तक यह संख्या कम होने का अनुमान है.
राष्ट्रवाद की राह पर चले सऊदी अरब के किंग
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के पहले नेता थे, जिन्होंने राष्ट्रवाद का नारा दिया था. राष्ट्रवाद से मतलब यह है कि सबसे पहले अपने राष्ट्र को प्राथमिकता दी जाएगी, उसके बाद अन्य देशों के बारे में सोचा जाएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी राष्ट्रवाद का नारा दिया. इसके तहत उन्होंने बाहरी देशों के नागरिकों के लिए एच-1 वीजा की प्रक्रिया को जटिल किया, ताकि उनके देश में बाहरी देशों के नागरिकों के लिए अमेरिका में नौकरी के अवसरों की सीमित किया जा सके.
अब अपने नवाबी और बिंदास लाइफ स्टाइल के लिए जाने जाने वाले सऊदी अरब के किंग भी राष्ट्रवाद की राह पर चल पड़े हैं.