Yemen Crises : यमन में सूखा और महामारी से 80 लाख लोग मरने से सिर्फ एक कदम दूर

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Yemen Crises : मानवीयता को बचाने के लिए यूएन ने कि पहल

Yemen Crises : सउदी अरब और उसका साथ देने वाली संयुक्त सेनाओं ने यमन में हाउथी विद्रोहियों के साथ युद्ध में जिस तरह तभाही मचाई है उससे वहां रहने वालों का जीवन नरक जैसा हो गया है.

इस तबाही से होने वाले और नुकसान को रोकने के लिए आखिरकार यूएन ने पहल की है.
सीनियर यूएन अधिकारी ने यमन युद्ध में शामिल सभी पक्षों को बुलाकर युद्ध कि वजह से होने वाले सूखे और कुपोषण की मार झेल रहे लोगों के जीवन में सुधार लाने की कोशिश कि है.
यूएन के मानवीय कोरडिनेटर जेमी गोल्डरिक का मानना है कि यमन में रह रहे 8.4 मिलियन लोग सूखा और महामारी की वजह से होने वाली मौतों से सिर्फ एक कदम की दूरी पर है.
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उन्होंने कहा कि हम वहां मेडिकल स्टॉफ, पानी, खाना जैसे बुनियादी मदद को जल्द से जल्द पंहुचाना चाहते है लेकिन हम ऐसा नहीं कर पा रहे हैं.

आपको बता दें कि अक्टूबर में रियाध के पास हुए मिसाइल हमले के बाद से सउदी अरब ने यमन से किसी भी तरह की घुसपैठ और हथियारों की तस्करी रोकने के लिए बॉर्डर बंद कर रखे है.
मगर अब जब हालात लगातार बिगड़ रहे हैं ऐसे में अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते सउदी अरब ने नवंबर के आखिरी महीने में मानवीयता के नाते लोगों को देश के अंदर शामिल होने की अनुमति दे दी है. लेकिन इसके बावजूद भी यमन के हालात गंभीर बने हुए हैं.
अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से इस बॉर्डर सील की सख्ती में कमी तो आई है लेकन फिर भी यूएन उतनी मदद नहीं पहुंच पा रहा है जितने लोगों को जरूरत है.
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अलज़जीरा के मुताबिक यूएन के लिए मुश्किलें 4 दिसंबर के बाद से और ज्यादा बढ़ गई है जब पूर्व राष्ट्रपति अली अबदुल्लाह का राजधानी साना में कत्ल कर दिया गया.
2011 से यमन में शुरू हुई इस सिविल वार ने इस गरीब देश को बर्बाद कर दिया है. अब तक इस युद्ध के चलते 10 हजार लोग अपनी जान गवां जान चुके है वहीं लगभग 30 लाख लोग बेघर हो चुके हैं.
अब इस देश में हैजा नाम की महामारी भी फैल चुकी है जिससे लगभग 10 लाख यमन नागरिक प्रभावित हैं.
मार्च 2015 में सउदी अरब सहित कई पड़ोसी देशों ने यमन की मदद के लिए आगे आए. इन सब की कोशिश थी कि देश से ईरान समर्थित हाउथी विद्रोहियों को निकाल सके और फिर से वहां राष्ट्रपति आब्द रबू मनसूर हादी की सरकार का गठन हो सके .